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शनिवार, अगस्त 14, 2010

बैटन के खेल का पुलिस अधिकारी ने निकाला तेल

बैटन रिले के लिए खेल विभाग ने जिस तरह से लगातार कई महीनों से योजना बनाई थी उसके बाद भी ये सोचने वाली बात है कि आखिर बैटन का खेल क्यों फेल हो गया। इसके कारणों की जब पड़ताल की गई तो मालूम हुआ कि ऐन समय पर पुलिस के एक प्रशासनिक अधिकारी जीएस बाम्बरा द्वारा अपनी मर्जी से कार्यक्रम को बदल देने के कारण सारे खेल संघों के पदाधिकारी खफा हो गए क्योंकि उनको तय किए गए स्थान पर बैटन पकडऩे का मौका नहीं दिया गया। ऐसे में जिसको जहां मौका मिला उसने मौके को भुनाते हुए धावकों से बैटन लेकर अपने मन की मुराद पूरी कर ली। इधर खेल विभाग के अधिकारी खेल संघों के पदाधिकारियों की दादागिरी से नाराज हैं, लेकिन वे भी खुले रूप में कुछ नहीं बोल पा रहे हैं।
बैटन रिले में गुरुवार को जिस तरह की अफरा-तफरी मची और जिसको जहां मर्जी हुई बैटन लेकर दौडऩे लगा। आखिर ऐसा होने के पीछे कारण क्या था जब यह जानने का प्रयास किया गया तो यह बात सामने आई कि शहीद भगत सिंह चौक से लेकर गांधी उद्यान तक के रास्ते को जीरो पाइंट घोषित किया गया था और इसी जीरो पाइंट के लिए खेल विभाग ने यह योजना बनाई थी कि इसमें मुख्यमंत्री से लेकर सभी मंत्रियों और वीआईपी के साथ खेल संघों के तय पदाधिकारियों को बैटन लेकर दौडऩे का मौका दिया जाएगा। लेकिन यह योजना उस समय धरी की धरी रह गई जब पुलिस के एक प्रशासनिक अधिकारी जीएस बाम्बरा ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को ही बैटन लेकर बहुत दूर तक ले गए। इसके बाद बैटन महापौर किरणमयी नायक को दी गई और फिर बैटन प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में ही नजर आई। बाम्बरा खुद भी बैटन को लेकर लंबे समय तक दौड़ते रहे। खेल संघों के पदाधिकारी खड़े के खड़े रह गए, लेकिन उनको बैटन छूने तक का मौका नहीं दिया गया। जब किसी तरह से बैटन पहले धावक विसेंट लकड़ा के हाथों में पहुंचने के बाद बैटन का आगाज हुआ तब तक खेल संघों के पदाधिकारियों में नाराजगी चरम पर पहुंच चुकी थी। ऐसे में खेल संघों के कई पदाधिकारियों से यह सोच लिया कि उनको जहां मौका मिलेगा वे भी बैटन लेकर दौड़ेंगे।  यही वजह रही कि जहां जिस खेल संघ के पदाधिकारी को मौका मिला उसने मौके का फायदा उठाते हुए बैटन लेकर दौडऩे का काम किया और खिलाडिय़ों को किनारे कर दिया गया।
इस मामले में जहां खेल संघों के पदाधिकारी खेल विभाग को दोषी मानते हैं कि उसने योजना के मुताबिक काम नहीं किया, वहीं खेल विभाग के अधिकारी अपना बचाव करते हुए कहते हैं कि हमने तो योजना ठीक बनाई थी लेकिन बीच में कोई योजना को न जानने वाला आकर अगर अपनी मनमर्जी करने लगे तो क्या किया जा सकता है। जिन लोगों को जीरो पाइंट में तैनात किया गया था वे लगातार यह कहते रहे कि खेल संघों के पदाधिकारियों को बैटन दी जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसा न होने के कारण ही माहौल खराब हुआ।
खेल विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब खेल संघों के पदाधिकारियों को यह साफ तौर पर बता दिया गया था कि उनको बैटन के रास्ते में बैटन लेकर नहीं दौडऩा है, यह रास्ता खिलाडिय़ों के लिए है इसके बाद भी इन्होंने खिलाडिय़ों से जबरन बैटन लेकर दौड़ऩे का काम किया। इस अधिकारी का कहना है कि ऐसा नहीं है कि खेल संघों के पदाधिकारियों को बैटन को पकडऩे का मौका नहीं मिला था। ज्यादातर पदाधिकारियों को उसी रात बैटन पकडऩे का मौका मिल गया था जब  वह ११ अगस्त को आई थी। होटल बेबीलोन के कार्यक्रम में मंच पर ही खेल संघों के पदाधिकारियों को बैटन दी गई थी। इतना सब होने के बाद भी जिस तरह का काम खेल संघों के पदाधिकारियों ने किया है, वह काम निंदनीय है। खेल संघों के पदाधिकारियों ने जो किया है, उससे साफ मालूम होता है इनको खिलाडिय़ों से कोई मतलब नहीं है।

2 टिप्पणियाँ:

patit pawan शनि अग॰ 14, 09:03:00 am 2010  
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
patit pawan शनि अग॰ 14, 09:15:00 am 2010  

आपका ब्रह्मवाक्य 'राजनीति के साथ हर विषय पर लेख पढ़ने को मिलेंगे'दूसरे अर्थों में सामने आ रहा है। आजकल राजनीति के अलावा दूसरे विषयों पर ही लेख पढ़ने को मिल रहे हैं। राजनीति कहां है आजकल?

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