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शनिवार, अगस्त 28, 2010

जब दोस्त ही पीछे से वार करें तो क्या करें

अचानक एक बात सामने आयी कि हम ब्लाग जगत में जिसे अपना दोस्त समझते थे, वही महाशय पीछे से वार कर रहे थे। हमें जब यह बात मालूम हुई तो हमें यकीन नहीं हुआ। लेकिन यह बात सच है। बहरहाल हमें इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, वैसे भी हम जानते हैं कि आज के जमाने में किसी पर भी आंखें बंद करके भरोसा करना बेकार है। उसने जो किया वह भुगतेगा, हमारा क्या बिगाड़ लेगा वह। चलिए यह तो अच्छा हुआ कि उसकी असलीयत जल्द सामने आ गयी, वैसे आज के जमाने में दो मुंहे लोगों की कमी नहीं है। ऐसे लोगों से सभी ब्लागर मित्रों को सावधान रहना चाहिए।

5 टिप्पणियाँ:

महफूज़ अली शनि अग॰ 28, 10:15:00 am 2010  

मेरे साथ तो यही हुआ.... जिसे मैं अपना भाई और दोस्त समझता था.... साला वही मार लिया पिछवाड़े से.... वैसे एक बात तो है.... कि यहाँ कुछ लोग बहुत ही जलनखोर हैं... हमसे भी गलती यही हुई कि आँख बंद कर के भरोसा कर लिया... पर अब आँख खुल गई है... मैं तो वैसे भी बहुत चूज़ी हूँ.... कभी गरीब .... कम पढ़े लिखे .... दिमागी तौर पर बदसूरत लोगों से दोस्ती नहीं करता ... और यहाँ (कुछ) लोग ऐसे ही हैं... यह बाद में समझ में आया...

Udan Tashtari शनि अग॰ 28, 10:17:00 am 2010  

सावधानी हटी, दुर्घटना घटी!!

महेन्द्र मिश्र शनि अग॰ 28, 10:29:00 am 2010  

अरे आप तो दो मुँहे की बात कर रहे है ... यहाँ तो शेषनाग भी विराजे हैं .... नाम मालूम न हो तो का सतर्क रहें ....

महेन्द्र मिश्र शनि अग॰ 28, 10:29:00 am 2010  

. यहाँ तो शेषनाग भी विराजे हैं .... नाम मालूम न हो तो का सतर्क रहें ....

ali शनि अग॰ 28, 04:26:00 pm 2010  

राजकुमार जी ,
आपके साथ बुरा हुआ , औरों के साथ भी हो सकता है पर सभी ब्लागर्स पर अविश्वास क्यों किया जाये ? हम अपनें विश्वास पर टिके रहें , दूसरे धोखा दें तो देते रहें !

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