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शनिवार, सितंबर 18, 2010

नक्सली हैं हमारे रोल मॉडल

जो नक्सली आज अपने देश के लिए नासूर बन चुके हैं उनको अगर कोई कहे कि वे हमारे रोल मॉडल हैं, तो वास्तव में यह दुखद बात होगी या नहीं? लेकिन इसका क्या किया जाए कि बस्तर के बच्चे नक्सलियों को ही अपना रोल मॉडल मानते हैं। नक्सलियों के बाद नंबर आता है शिक्षा कर्मियों को।
कल की ही बात है हम एक आईपीएस अधिकारी के पास बैठे थे तो चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि बस्तर में करवाए गए एक सर्वे में यह चौकाने वाली बात सामने आई कि वहां के अधिकांश बच्चे नक्सलियों को ही अपना रोल मॉडल मानते हैं। जब अफसर ने यह बात बताई तो उसी समय वहां पर उपस्थित एक अन्य अधिकारी ने ये यह बात बताई कि इसमें कुछ नया नहीं है। उन्होंने बताया कि जिस समय पंजाब में आतंकवाद चरम पर था तो वहां के बच्चे जब कुछ खेल खेलते थे तो उस खेल में आंतकवादी और पुलिस वालों का रोल ज्यादा होता था। उन्होंने कहा कि यह तो बच्चों की मानवीय प्रवृति है कि उनके आस-पास जो घटता है या उनको बार-बार जिनके बारे में सुनने को मिलता है तो उसे ही वे अपना रोल मॉडल समझने लगते हैं। अब बस्तर के बच्चों को पैदा होने के बाद जब होस संभालने का मौका मिलता है तो उनके कानों में हर वक्त बस एक ही आवाज सुनाई पड़ती है और वह आवाज होती है नक्सलियों की। 
ऐसे में अगर बस्तर के बच्चे नक्सलियों को अपना रोल मॉडल मनाते हैं तो इसमें आश्चर्य वाली बात नहीं है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि बस्तर के आदिवासी अपने बच्चों के दिलों से नक्सलियों को नहीं निकाल सकते हैं। इसके लिए तो पूरी तरह से सरकार दोषी है। अगर बस्तर में पुलिस ने ऐसा काम किया होता जिससे नक्सलियों का सफाया हो जाता तो आज बस्तर के बच्चों के नक्सली नहीं पुलिस के जवान रोल मॉडल होते। लेकिन लगता नहीं है कि कभी ऐसा हो पाएगा।
नक्सलियों को जड़ से उखाड़ फेंकने की न तो सरकार के पास ताकत है और न ही उनकी औकात है। नक्सलियों के पास जैसे और जितने हथियार हैं वैसे हथियार उनसे लडऩे वाले जवानों के पास न तो हैं और हो सकते हैं। हमें तो लगता है कि सरकार की मानसिकता ही नहीं है कि नक्सलियों का सफाया हो। बहरहाल यहां पर नक्सलियों के सफाए का सवाल नहीं सवाल है बस्तर के उन मासूम बच्चों का जो नक्सलियों को अपना रोल मॉडल समझते हैं। इन बच्चों के लिए कुछ करना जरूरी है, नहीं तो आगे चलकर वे जिनको अपना रोल मॉडल समझते हैं उनके बताए रास्ते पर ही चलने लगेंगे। इसमें भी कोई दो मत नहीं है कि बस्तर के युवा आज नक्सलियों की ताकत बनते जा रहे हैं। इस ताकत को समाप्त करने के लिए कुछ न कुछ रास्ता निकालना ही होगा। 

11 टिप्पणियाँ:

Rahul Singh शनि सित॰ 18, 07:47:00 am 2010  

कुछ बच्‍चों ने या किसी एक बच्‍चे ने ऐसा कहा हो या न भी कहा हो तो यह सोचनीय है लेकिन क्‍या इसे सामान्‍य रूप से सारे बच्‍चों पर घटा कर देखना ठीक होगा.

राजकुमार ग्वालानी शनि सित॰ 18, 08:19:00 am 2010  

राहुल जी,
बस्तर में किसी एक बच्चे ने नहीं बल्कि ज्यादातर बच्चों ने ऐसा कहा है वहां एक सर्वे करवाया गया है।

pranav शनि सित॰ 18, 08:55:00 am 2010  

चिंता की बात है

pranav शनि सित॰ 18, 08:56:00 am 2010  

कब तक सोती रहोगी सरकार

neha शनि सित॰ 18, 08:57:00 am 2010  

आदिवासियों को जगाने की जरूरत है

rajesh patel शनि सित॰ 18, 08:58:00 am 2010  

बस्तर में खेलों पर ध्यान दें सब ठीक हो जाएगा

राजकुमार ग्वालानी शनि सित॰ 18, 09:03:00 am 2010  

प्रणव, नेहा, राजेश जी की बातों में दम है

पी.सी.गोदियाल शनि सित॰ 18, 09:51:00 am 2010  

राजकुमार जी नक्सली की ब्याख्या मैं इस तरफ करता हूँ नक्(नाक) + सली ( शिल्पकार ) याने जो नाक के शिल्पकार है , अर्थात महाबेशर्म !! लेकिन अगर गौर करे तो इन नक्सलियों ने दिल्ली के ताजोतख्त पर भी कब्ज़ा किया ह़ा है और जब दिल्ली के ताजोतख्त पर बैठे नक्सली लोगो के रोल मॉडल हो सकते है तो वस्त्र के नक्सली क्यों नहीं ?

पी.सी.गोदियाल शनि सित॰ 18, 09:51:00 am 2010  

Sorry,वस्त्र को बस्तर पढ़े

ali शनि सित॰ 18, 10:37:00 am 2010  

समस्या बहुआयामी / सार्थक विमर्श और पहल से हल होगी इसके खात्में के लिये कोई एकांगी मार्ग नहीं है !

Ratan Singh Shekhawat शनि सित॰ 18, 08:47:00 pm 2010  

बहुत चिंताजनक है ये सब

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