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रविवार, दिसंबर 12, 2010

समीरलाल के साथ ट्रेन में लंबा सफर

हम करीब 15 दिनों से बाहर थे। दिल्ली पहुंचे तो एक बार सोचा कि चलो यार यहां के ब्लागरों को फोन किया जाए और कम से कम अजय कुमार झा और राजीव तनेजा से मिल लिया जाए। फिर इरादा बदल दिया और सीधे पकड़ ली रायपुर जाने वाली ट्रेन। ट्रेन में देखा कि अपने समीरलाल यानी उडऩ तश्तरी भी बैठे हैं। हमने तो उनको पहचान लिया, लेकिन उन्होंने हमें नहीं पहचाना। हम उनके साथ दिल्ली से रायपुर तक का लंबा सफर तय करके आए, पर उनसे कोई बात नहीं हो सकी।
ट्रेन में समीर लाल जी के साथ लंबा सफर तय करने के बाद जब ट्रेन हमारे शहर रायपुर पहुंची और समीर लाल जी भी ट्रेन से उतर गए तो हम उनके पीछे-पीछे गए और उनसे पूछा कि समीर भाई हमें पहचान रहे हैं क्या?
उन्होंने जवाब में किसी का नाम लिया।
हमने कहा नहीं थोड़ी सी कोशिश करें।
उन्होंने फिर कोई और नाम लिया।
हमने कहा अब भी आप पहचान नहीं पा रहे हैं। अंत में हमने उनसे कहा कि क्या यहां के किसी प्रिंस ( हमारी मित्र मंडली हमें इसी नाम से पुकारती है) की याद है। तब उन्होंने कहा कि अरे राजकुमार जी आप हैं।
हमने कहा बिलकुल हम हैं।
हमारे इतना कहते हैं समीर भाई आकर हमारे गले लग गए और जादू की झपी दे दी।
इतना होने के बाद अचानक जोर का झटका हाय जोरों से लगा और हमारी नींद खुल गई। हमने देखा तो सुबह के छह बजे थे। इसके बाद हमने फिर से यह सोचकर सोने की कोशिश की कि शायद हमारे सपने की अगली कड़ी जुड़ जाए, लेकिन कहां जनाब सपने की भी भला कभी कोई अगली कड़ी जुड़ती है, अंत मेें हमें एक घंटे तक नींद का इंतजार करने के बाद उठना पड़ा।
अब इसका क्या किया जाए कि अपने समीर भाई छत्तीसगढ़ आने का सपना दिखाकर अचानक मिस्टर इंडिया बनकर गायब हो गए हैं। खैर समीर लाल जी न सही भगवान तो हम पर जरूर मेहरबान हो गए हैं जिन्होंने हकीकत में न सही सपने में ही सही अपने समीर भाई से मुलाकात तो करना दी है। लेकिन उनसे हकीकत में मुलाकात के लिए हम इंतजार करेंगे।
अंत में हम यही कहेंगे....
हम इंतजार करेगा उनका कयामत तक
खुदा करे के कयामत हो और समीर लाल आएं

7 टिप्पणियाँ:

Arvind Mishra रवि दिस॰ 12, 09:40:00 am 2010  

अरे भाई हमें भी चढ़ा कर तुरंत उतार दिया .य..ह थी..क न...हीं है

संगीता पुरी रवि दिस॰ 12, 11:20:00 am 2010  

जब समीर लाल जी को पहचान लिया था .. तो पूरी यात्रा बात करते हुए बितानी थी .. इतनी देर बाद सामने आएंगे तो निराशा तो होगी ही .. पर आपने इतने अच्‍दे ढंग से प्रस्‍तुतीकरण की कि अंत में ही जाकर पता चला कि ये सपना है !!

खुशदीप सहगल रवि दिस॰ 12, 11:53:00 pm 2010  

राज जी, मेरा तो सपना आज सच हो गया...

http://deshnama.blogspot.com/2010/12/blog-post_12.html

जय हिंद...

ali सोम दिस॰ 13, 09:23:00 am 2010  

कैसे भी हुई पर मुलाक़ात तो हो ही गयी ना :)

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