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सोमवार, जनवरी 04, 2010

दक्ष के पिछले जन्म का राज भी खोलने की हिम्मत दिखाएं एनडीटीवी

एनडीटीवी वालों ने जबसे राज पिछले जन्म का की एक कड़ी में पंजाबी फिल्मों की नायिका मन्नत सिंह के पिछले जन्म का राज खोला था तब एक बात सामने आई थी कि उनके पिछले जन्म का प्रेमी इस जन्म में दक्ष के रूप में उनको मिला है। अगर वास्तव में एनडीटीवी वालों को लगता है कि वे सच में पिछले जन्म का राज खोलने का सही काम कर रहे हैं और उनके द्वारा जो राज खोले जा रहे हैं, वह १०० प्रतिशत सच हैं तो फिर उनको अपनी सच्चाई साबित करने के लिए दक्ष को भी उसी टेबल पर लिटा कर उनके पिछले जन्म का राज खुलवाया जाए, अगर मन्नत सिंह और दक्ष की कहानी एक होगी तभी माना जाएगा कि पिछले जन्म के राज में कुछ सच्चाई है। वैसे भी यह कार्यक्रम ज्यादातर लोगों को बकवास लग रहा है।

इन दिनों एनडीटीवी का एक कार्यक्रम राज पिछले जन्म का हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा का विषय इसलिए की इस कार्यक्रम पर कोई यकीन करने को तैयार नहीं है। माना कि पिछले जन्म में विश्वास किया जाता है, लेकिन जिस तरह से एनडीटीवी वाले थोक के भाव में लोगों के पिछले जन्म का राज खोल रहे हैं, यह गले उतरने वाला नहीं है। एक कड़ी में जब पंजाबी फिल्मों की नायिका मन्नत सिंह के पिछले जन्म का राज खोला गया तो हद ही हो गई। मन्नत मैडम को पिछले २० सालों से पीठ में दर्द है और उनके इस दर्द का कारण डॉक्टर जानने में जब असफल रहे तो वह पहुंच गई एनडीटीवी की डॉक्टर तृप्ति जैन की शरण में। अब डॉक्टर जैन तो हैं ही इस काम के लिए। सो उन्होंने फटाफट उनके पिछले जन्म का राज खोल कर बता दिया कि उनके दर्द का कारण क्या है। मन्नत सिंह जो पिछले जन्म में पाकिस्तान में पैदा हुई थी, उनको उनके प्रेमी सुल्तान के साथ पाकिस्तानी सैनिकों ने बार्डर पार करने के संदेह में पहले संगीनों से पीठ में मारा फिर मन्नत सिंह को पीठ में और उनके प्रेमी को पेट में गोली मार दी। मन्नत सिंह ने अपने पिछले जन्म के प्रेमी को इस जन्म में अपने मित्र दक्ष के रूप में पहचान भी लिया।

मन्नत सिंह जब वापस अपने इस जन्म में आई को उनके साथ कार्यक्रम में आए दक्ष ने भी इस बात का खुलासा किया कि उनको भी पिछले दो साल के पेट में ठीक उसी स्थान पर दर्द होता है जहां पर उनके पिछले जन्म में मन्नत के मुताबिक गोली लगी थी। जब दक्ष भी यह मान रहे हैं कि वे पिछले जन्म में मन्नत सिंह के प्रेमी थे और उनको भी गोली लगी थी ते फिर देर किस बात की है, उनको भी उसी उडऩखटोले में लिटाने की हिम्मत क्यों नहीं की जा रही है जिस पर मन्नत सिंह को लिटाया गया था। अगर एनडीटीवी वालों में अपने कार्यक्रम के प्रति इतना ही विश्वास है तो उनको यह साहस तो दिखाना ही चाहिए। वैसे हम यह बात भी जानते हैं कि अगर उन्होंने यह साहस दिखाया तो भी इसका मतलब यह नहीं होगा कि उनका कार्यक्रम सच्चा है। वे जरूर मन्नत सिंह के लिए बनाए गए नाट्य रूपांतरण को ही फिर से दिखा सकते हैं। लेकिन फिर भी हम ऐसा चाहते हैं कि एक बार एनडीटीवी वाले ऐसा साहस करें, क्या उनमें इतना दम है कि वह दक्ष के भी पिछले जन्म का राज खोले। अगर दम नहीं है तो फिर क्यों कर लोगों की उन भावनाओं से खेला जा रहा है जिसमें पिछले जन्म पर विश्वास किया जाता है।

5 टिप्पणियाँ:

काजल कुमार Kajal Kumar सोम जन॰ 04, 07:06:00 am 2010  

सबसे मज़ेदार बात तो ये है कि आज तक इनमें से कोई भी पिछले जन्म में कुत्ता-बिल्ली-सियार-गधा-सुअर-चूहा नहीं बना मिला. सभी पिछले जन्मों में तोप थे...

इससे एक बात तो सिद्ध हो गई कि हमारी फ़िलासफ़ी व बाबा लोग झूठ बोलते चले आए हैं कि 84 लाख योनियां होती हैं व सबसे अंत में इन्सान बनने की बारी आती है. ये सभी झक्क मारते रहे हैं...

या इन दोनों में से एक तो गड़बड़ या दोनों ही तीसमारखां हैं...कुछ पता नहीं चल रहा..अलबत्ता आम लोगों की फ़ीड चालू है :)

Udan Tashtari सोम जन॰ 04, 07:11:00 am 2010  

आप तो ऐसा चैलेंज कर गये कि कौन मानेगा!!


’सकारात्मक सोच के साथ हिन्दी एवं हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार एवं प्रसार में योगदान दें.’

-त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाना जरुरी है किन्तु प्रोत्साहन उससे भी अधिक जरुरी है.

नोबल पुरुस्कार विजेता एन्टोने फ्रान्स का कहना था कि '९०% सीख प्रोत्साहान देता है.'

कृपया सह-चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने में न हिचकिचायें.

-सादर,
समीर लाल ’समीर’

Arvind Mishra सोम जन॰ 04, 07:38:00 am 2010  

काजल कुमार जी ने बड़ी मार्के की बात कही है ,सभी पुण्यात्मा लोग ही हैं
और लगातार कई जन्मो से मानुष योनी में ही अवतरित हुए हैं
बेवकूफों का संगम !

मनोज कुमार सोम जन॰ 04, 07:53:00 am 2010  

जिस सीरियल को हम देखते नहीं ... ...

ताऊ रामपुरिया सोम जन॰ 04, 11:26:00 am 2010  

पुर्व जन्म के पुण्यात्माओं को ही इस प्रोग्राम मे शामिल किया जाता है.:) यह वैधानिक चेतावनी लगा देनी चाहिये.

रामराम.

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