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मंगलवार, जनवरी 05, 2010

क्या कोई ब्राम्हण उफ अल्ला कह सकता है?

आप लोगों को लगता है कि कोई ब्राम्हण जाने-अंजाने में कभी उफ अल्ला कह सकता है। जिस तरह से हिन्दुओं के मुंह से किसी भी अच्छी या बुरी बात पर हे भगवान निकलता है, ठीक उसी तरह से किसी मुस्लिम भाई के मुंह के या अल्ला या फिर उफ अल्ला निकलता है। कभी किसी ने किसी मुसलमान को हे भगवान या फिर किसी हिन्दु को या अल्ला कहते नहीं सुना होगा। लेकिन अपने एनडीटीवी वाले न जाने किस मिट्टी के बने हैं जो वे एक ब्राम्हण से उफ अल्ला बुलवाने में सफल हो गए। यह घटना उस समय घटी जब अपने बकवास सीरियल राज पिछले जन्म का, में इस कार्यक्रम के सूत्रधार रवि किशन के पिछले जन्म का राज जानने का प्रयास डॉक्टर तृप्ति जैन कर रही थीं। तब एक स्थान पर अपने नौटंकीबाज रवि किशन साहब उफ अल्ला कहते हैं।

सोमवार की रात को जिसने भी एनडीटीवी का कार्यक्रम राज पिछले जन्म का देखा होगा उसको अब तो कम से कम इस बात का पक्का यकीन हो गया होगा कि यह कार्यक्रम महज एक नौटंकी के सिवाए कुछ नहीं है। इस दिन इस कार्यक्रम के सूत्रधार रवि किशन को उडऩ खटोले पर लिटाया गया था और उनसे उनके पिछले जन्म का राज पूछा जा रहा था। अपने रवि साहब पिछले जन्म में एक ब्राम्हण परिवार में पैदा हुए रहते हैं और वे उस जन्म में एक नहीं बल्कि तीन हत्याएं कर देते हैं। एक उस नागा साधु की जो उनके पिता को त्रिशुल मार कर मार डालते हैं और दो उन पुलिस वालों की जो उनकी मां और पत्नी को परेशान करते हैं।

तो रवि साहब अपने पिछले जन्म की दास्तान सुनते हुए कभी हिन्दी में तो कभी अंग्रेजी में बोलने लगते हैं। यहां तक तो बात समझ आ रही थी, लेकिन जब वे एक स्थान पर उफ अल्ला कहते हैं तो कम से कम हमें तो पक्का यकीन हो गया कि वास्तव में यह सीरियल एक हाई क्लास नौटंकी के अलावा कुछ नहीं है। रवि किशन के हाव-भाव देखकर ही लग रहा था कि वे नौटंकी कर रहे हैं। वैसे तो और भी कई लोगों के कार्यक्रम में ऐसा लगा है, पर रवि किशन के कार्यक्रम ने जरूर यह साबित करने का काम किया है कि वास्तव में कैसे दर्शकों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। हमारे एक मित्र जो कभी इस कार्यक्रम की तारीफ करते हुए थकते नहीं थे, उनको भी यकीन हो गया है कि यह कार्यक्रम एक नौटंकी के सिवाए कुछ नहीं है। रवि किशन कभी अपने पिता को पापा कहते हैं तो कभी पिता कहते हैं।
सारी बातें अपनी जगह है लेकिन यह बात गले उतरने वाली नहीं है कि कोई ब्राम्हण कैसे बेख्याली में या फिर गलती से भी उफ अल्ला कह सकता है। क्या हमारे ब्लाग बिरादरी के मित्रों ने किसी ब्राम्हण को अपने जीवन में उफ अल्ला कहते सुना है। अगर सुना है तो जरूर बताएं। हमें नहीं लगता है कि किसी ने ऐसा सुना होगा। हमने तो किसी को ऐसा कहते नहीं सुना है, क्या आपने सुना है। आपके इस बारे में क्या विचार हैं, जरूर बताएं।

14 टिप्पणियाँ:

बेनामी,  मंगल जन॰ 05, 09:39:00 am 2010  

किसी हिन्दु के अल्ला बोलने पर कोई पाबंदी नहीं है, आप क्यों आपति कर

बेनामी,  मंगल जन॰ 05, 09:39:00 am 2010  

किसी हिन्दु के अल्ला बोलने पर कोई पाबंदी नहीं है, आप क्यों आपति कर

बेनामी,  मंगल जन॰ 05, 09:39:00 am 2010  

किसी हिन्दु के अल्ला बोलने पर कोई पाबंदी नहीं है, आप क्यों आपति कर

neha मंगल जन॰ 05, 09:42:00 am 2010  

हमने किसी हिन्दु को अल्ला बोलने नहीं सुना है

अल्पना वर्मा मंगल जन॰ 05, 10:08:00 am 2010  

यह सीरियल एक हाई क्लास नौटंकी के अलावा कुछ नहीं है।-sach hai!
-----------------------------
aap ne kahaa--क्या हमारे ब्लाग बिरादरी के मित्रों ने किसी ब्राम्हण को अपने जीवन में उफ अल्ला कहते सुना है। अगर सुना है तो जरूर बताएं।
arre...yah to koi baat nahin hui!!!!!!

jo bhi Islamic deshon men kaam karte hain unke liye..[wo koi bhi dhram ke hon]--
-- ye shbd bahut common hain-inke bina rozmarra ki baat poori nahin hoti-
-jaise--

Masha-allah,Insha-allah[most common-]
al hamduli-laah,wa'allaah......etc etc......
sab mein shbdon mein---allah hi hai....

-------aur jab ham kisi muslim se milte hain to 'salamwalakum' kahate hi hain--
-us samay ye yaad bhi nahin rahta hai ki ham hindu brahmin hain ya kuchh aur--automatic ye shbd zuban par aate hain.....
------
baat seehi yah hai ki jaise mahol mein aap badhe hote hain waisa hi seekhte hain aur..waisa hi behave karte hain.
----------------

अल्पना वर्मा मंगल जन॰ 05, 10:15:00 am 2010  

Aur...Aisi koi pabandi nahin hai ki brahmin 'allah na bolen ya muslim -raam na bolen--

***jahan bhi sarvdharam prayers hoti hain wahan bhi aisee koi bandish nahin hai ki muslim prayer hindu na bole..***

bharat mein aisa shayd kisi ne na suna ho lekin hamne to in deshon mein rahte hue brahmin ko allah bolte suna hai.
----------------------
Mujhe samjh nahin aata ki hindustan mein itna hindu -muslim mein itna bhed kyun hain..
jabki yah difference hamne yahan itne saalon se rahte hue kabhi bhi dekha kya.. mahsus bhi nahin kiya......

Suresh Chiplunkar मंगल जन॰ 05, 10:19:00 am 2010  

अमूमन मैं किसी भी थर्ड क्लास सीरियल को या तो उसकी काफ़ी आलोचना के बाद देखता हूं या फ़िर पहला एपीसोड देखते ही जान जाता हूं कि यह घटिया नौटंकी है…। पुनर्जन्म पर विश्वास नहीं होने के कारण आज तक इसे नहीं देखा… अब आप कह रहे हैं तो इसका एकाध एपीसोड देख लेंगे कि आखिर NDTV कम्पीटीशन के लिये कितने नीचे स्तर तक गिर सकता है…

pooja मंगल जन॰ 05, 12:30:00 pm 2010  

हमने भी जब राज पिछले जन्म का देखा तो रवि किशन द्वारा जो कि एक ब्राह्मण परिवार से हैं अल्ला कहना अजीब लगा ...

शायदा मंगल जन॰ 05, 07:56:00 pm 2010  

हां जी, हमने सुना है और एक से ज्‍यादा ब्राहमणों को ऐसा कहते सुना है। सीरियल पर कोई कमेंट नहीं है आपकी बात का जवाब है महज।

बवाल मंगल जन॰ 05, 10:21:00 pm 2010  

मियाँ हमने तो आज ही सवेरे हनूमान चालीसा पढ़ी है और शाम को मग़रिब की नमाज़ भी पढ़ी। दोपहर अधोलिया जी के यहाँ सुन्दरकांड भी सुनी और अगले पखवाडे चौबे जी बुक कर चुके हैं कि भाईजान हमारे यहाँ एक आध दिन सिय-विजन-वास (सीता का वनवास) तो सुना दीजिए। अब बतलाइए ग्वालानी साहब इस पर कुछ कहना है आपको ? इज़रायल में रामाल्लाह नामक जगह ऐसे ही नहीं है भाई। कुछ तो है उसके पीछे।
हमारे रामजी और हमारे अल्ला मियाँ को लोग बख़्शते क्यूँ नहीं भाई ?

ab inconvenienti मंगल जन॰ 05, 11:24:00 pm 2010  

भाई मैं ब्राहमण तो नहीं पर हिन्दू बनिया वर्गीय जाति से हूं. और नास्तिक होने के बाद भी मेरे मुंह से कभी राम रे, कभी अल्लाह, और ज़्यादातर 'my God ! ' निकलता है, बस यूँ ही (शायद टीवी और फिल्मों का असर है). पुनर्जन्म पर विश्वास अपना भी नहीं तो यह सीरियल आज तक नहीं देखा.

बेनामी,  बुध जन॰ 06, 12:44:00 am 2010  

भाई साहब कोई हिन्दु तो फिर भी अल्ला का नाम ले सकता है, पर कोई मुसलमान भूले से भी हे भगवान नहीं कहेगा

शबनम खान बुध जन॰ 06, 01:46:00 am 2010  

Dukh ho raha ha ye sari tippaniya padhkar... mudda kya tha kya ban gya..... PICHLE JANM KA RAAZ NAUTANKI HA...bas yahi baat thi....kya bana di ha aap sabne???kya is behes se koi fayeda ha?kadvahat hi badegi.... benami se jo bhi comment kar rahe ha unhe khudpar hi vishvas nhi ha ki vo sahi bhi haa ya nhi...tabi to nam nahi dete aur baate badi badi karte ha...
aap sabse request ha dharm mazhab k taraju se kisi bhi chiz ko taulna band kijiye.....

arvind सोम जन॰ 18, 12:34:00 pm 2010  

vaise aisaa kahane me koi harj nahee, lekin ye serial to drama hee hai.

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