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शनिवार, जनवरी 30, 2010

ब्लाग जगत से हमारा रिश्ता भी तीन साल पुराना है

ब्लाग जगत में भले हमारी पहचान बने हुए एक साल भी नहीं हुआ है, लेकिन हम बता दें कि ब्लाग जगत से हमारा रिश्ता भी करीब तीन साल पुराना है। हमने जुलाई 2007 में पहली बार हरफनमौला नाम से ब्लाग बनाकर ब्लाग जगत में कदम रखा था। इसके बाद एक ब्लाग राजकुमार ग्वालानी नाम से अक्टूबर 2008 में बनाया। लेकिन जहां तक नियमित लेखन का सवाल है तो हमने 3 फरवरी 2009 से खेलगढ़ और इसके बाद 23 फरवरी से राजतंत्र के माध्यम से नियमित लिखना प्रारंभ किया है जो अब तक जारी है और आगे भी हमेशा जारी रहेगा।

आप लोग सोच रहे होंगे कि आज हमें अचानक ब्लाग जगत से अपने पुराने रिश्ते की याद कैसे आ गई। हम इस बात का खुलासा करते भी नहीं लेकिन क्या करें हमारे एक ब्लागर मित्र ने हमें एक दिन जता दिया कि वे ब्लाग जगत में बहुत सीनियर हैं। इसमें कोई दो मत नहीं है कि वे सीनियर हैं, लेकिन इसके लिए जताने की क्या जरूरत है। जब उन्होंने जता ही दिया है तो हम भी उनको बताना चाहते हैं कि भाई भले हमने ब्लाग जगत में अभी पहचान बनाई है, लेकिन जहां तक ब्लाग जगत से रिश्ते का सवाल है तो हमारा ब्लाग जगत से तो रिश्ता उसी दिन जुड़ गया था जब हमने हरफनमौला नाम से ब्लाग बनवाया था। हमारा यह ब्लाग बनाने का काम जयप्रकाश मानस जी ने किया था। तब हम वाकई में ब्लाग के बारे में कुछ नहीं जानते थे, उन्होंने ही हमसे कहा था कि आपकी खेलों में इतनी अच्छी पकड़ है और अपना इतना अच्छा लिखते हैं तो क्यों नहीं आप अपने लेखन को अंतरराष्ट्रीय मंच देने का काम करते हैं। यही कहते हुए उन्होंने हमारा ब्लाग बना दिया। अब यह हमारा दुर्भाग्य ही रहा कि हम उस समय कुछ नहीं लिख सके। इसके पीछे कारण यह रहा कि हम यूनिकोड में लिख नहीं पाते थे, और साथ ही हमें समय भी नहीं मिलता था।

इसके बाद हमारी श्रीमती अनिता ग्वालानी ने एक दिन हमारा एक और ब्लाग राजकुमार ग्वालानी के नाम से अक्टूबर 2008 में बना दिया। इस ब्लाग में हमने 13 पोस्ट लिखी। लेकिन इसको भी हम नियमित नहीं रख सके। हमारे ये दोनों ब्लाग याहू की आईडी से बने थे। हमने जब अपनी पत्रिका खेलगढ़ को इंटरनेट पर डालने का मन बनाया तो इसी के लिए खेलगढ़ बनाया गया। यह ब्लाग की संरचना भी हमारी श्रीमती श्रीमती अनिता ग्वालानी ने की। इस ब्लाग का प्रारंभ 3 फरवरी 2009 को किया गया। इसके 20 दिन बाद ही हमने राततंत्र का प्रारंभ किया। अब तो हम इन दोनों ब्लागों में नियमित लिख रहे हैं। एक बात हम भी बता दें कि जब हमने ब्लाग जगत से नाता जोड़ा था तब बमुश्किल एक हजार ब्लागर भी नहीं लिखते थे, और उस समय एक मात्र एग्रीगेटर के रूप में नारद जाने जाते थे।

11 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari शनि जन॰ 30, 06:29:00 am 2010  

तब तो आप वरिष्ट ही कहलाये, उस श्रेणी में. :)

कोई गिरोह वगैरह?? अरे सॉरी, यहाँ गुट कहते हैं. :) हा हा!!

राजकुमार ग्वालानी शनि जन॰ 30, 08:06:00 am 2010  

आदरणीय समीर लाल जी एवं शास्त्री जी
हमने कोई वरिष्ठ कहलाने के लिए यह पोस्ट नहीं लिखी है। अपने को वरिष्ठ समझने वाले एक ब्लागर मित्र को महज बताने के लिए न चाहते हुए भी इस पोस्ट को लिखना पड़ा। हम जूनियर और सीनियर के चक्कर में कभी नहीं रहते हैं। कई जूनियरों के पास सीनियरों से ज्यादा ज्ञान होता है। एक कहावत भी है कि गुरू गुड़ रह गया और चेला शक्कर हो गया। तो ऐसा भी होता है।

बी एस पाबला शनि जन॰ 30, 08:38:00 am 2010  

गिरोह!?

उड़न तश्तरी भी कभी चूकती नहीं :-)

बी एस पाबला

Udan Tashtari शनि जन॰ 30, 09:03:00 am 2010  

विनोदवश कहा है तो विनोदवश ही लेना भाई.. :)

बी एस पाबला शनि जन॰ 30, 09:33:00 am 2010  

उड़नतश्तरी किसी के वश में!

हुँह, कभी नहीं :-)

बी एस पाबला

ललित शर्मा शनि जन॰ 30, 10:02:00 am 2010  

भैया सबसे जुनियर हम ही हैं, लगता नही कभी सिनियर हो भी पाएंगे।:)

Sanjeet Tripathi शनि जन॰ 30, 01:43:00 pm 2010  

निसंदेह आप वरिष्ठ हैं बहुतों से, उम्र में भी और लेखन में भी, अब देखिए न, यहां तो लोग सालों रहने के बाद भी हजार पोस्ट नहीं लिख पाते, और आपकी सक्रियता तो वाकई काबिले तारीफ है।
शुभकामनाएं।

वैसे जयप्रकाश मानस जी की यह बात तो माननी पड़ेगी, वे न केवल छत्तीसगढ़ के आदि हिंदी ब्लॉगर कहे जा सकते हैं बल्कि बहुतों को उन्होंने ब्लॉग लिखने के लिए प्रेरित भी किया है। अपन भी उन्हीं के ब्लॉग का एक लेख पढ़ कर ही ब्लॉग लिखने के लिए प्रेरित हुए थे।

@ उड़नतश्तरी की नजर से भला कोई गिरोह या गुट छिप सकता है क्या ;) आखिर उड़नतश्तरी की गिनती तो वरिष्ठतम में शुमार होती है न

@ पाबला जी, उड़नतश्तरी कहां किसी के वश में आने वाली है वह तो वश में करती है। ;)

Mithilesh dubey शनि जन॰ 30, 06:44:00 pm 2010  

बधाई हो आपको बहुत-बहुत ।

अविनाश वाचस्पति शनि जन॰ 30, 08:56:00 pm 2010  

वरिष्ठ
ग़रिष्ठ
तो
बहुत हो चुका

पर भ्रष्ट कोन
बतलायेगा ?

काजल कुमार Kajal Kumar शनि जन॰ 30, 10:30:00 pm 2010  

वाह आपने याद दिलाया ता मुझे याद कि पहला ब्लाग मैंने भी 3 साल पहले ही बनाया था http://www.blogger.com/profile/00998541605207954925
पहिये मैंने भी इसमें बाद में ही लगाए थे :)

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