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शुक्रवार, नवंबर 13, 2009

काश हम भी उडऩ टिप्पणी बन पाते


सुबह हो या शाम या फिर रात का कोई भी पहर हो जब भी ब्लाग की दुनिया में जाते हैं और ब्लागों को खगालने का काम करते हैं तो एक नाम ऐसा है जो हर ब्लाग में नजर आ जाता है। आप समझ ही गए होंगे कि हम किनकी बात कर रहे हैं। ठीक समझे आप हम आदरणीय समीरलाल जी यानी उडऩ तश्तरी की ही बात कर रहे हैं। हम सोचते हैं कि यार काश हम भी समीरलाल जी की तरह उडऩ टिप्पणी बन पाते और हर ब्लाग में जाकर टिपियाते। लेकिन क्या करें यह कमबख्त समय ही ऐसा है कि हमें नसीब नहीं होता है। हमें लगता है जैसा हम सोचते हैं वैसा ही सभी ब्लागर सोचते होंगे कि काश वे भी इतना ज्यादा टिपिया पाते कि हर ब्लाग गुलशन टिप्पणियों से आबाद हो जाता।

हमें ब्लाग जगत में कदम रखे एक साल भी नहीं हुआ है और इस छोटे से समय में हमें एक नाम ऐसा लगा है जिन्होंने हर ब्लागर को प्रोत्साहित करने का काम किया है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि जब भी समय मिलता है और हम कम्प्यूटर पर बैठते हैं और नेट से नाता जोड़ते हैं तो सबसे पहला नाम जो किसी भी ब्लाग में नजर आता है वह उडऩ तश्तरी का होता है। चिट्ठा जगत में जब धड़ाधड़ टिप्पणी वाले कालम पर नजरें जाती हैं तो वहां भी लाइन से उडऩ तश्तरी का नाम नजर आता है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि अगर ब्लाग जगत में कोई सबसे ज्यादा टिप्पणी करते हैं तो वे समीरलाल जी ही हैं। एक दिन हम ब्लागर अपने मित्र ललित शर्मा के साथ बैठे थे तो अचनाक टिप्पणियों पर बात निकली तो उन्होंने भी कहा कि यार ये बात समझ में नहीं आती हैं कि जब भी ब्लाग खोलो तो उसमें समीरलाल जी की टिप्पणी जरूर होती है। शर्मा जी कहते हैं कि यार ये अपने समीर लाल जी आखिर सोते कब हैं? इसी के साथ उन्होंने कहा कि इनको इतना समय कैसे मिल जाता है इतनी सारी टिप्पणियां करने के लिए।

बहरहाल जो भी है समीर लाल जी हर ब्लागर को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं, इसमें कोई दो मत नहीं है। अगर अपने ब्लाग जगत में और कुछ समीर लाल जी जैसे लोग हो जाए तो हिन्दी ब्लाग जगत बहुत ऊंचाईयों पर जा सकता है। हम भी सोचते हैं कि काश हम भी ऐसा कर पाते। जिस ब्लाग को खोलते हैं और पढऩे के लिए समय निकलते हैं उसके बाद सोचते हैं कि चलो इस पर तो टिप्पणी कर दी जाए, लेकिन क्या करें कमबख्त समय का। जब सोचते हैं कि कोई टिप्पणी कर दें तो पता चलता है कि प्रेस में मीटिंग में जाने का समय हो गया है। हमें कम्प्यूटर में एक तो सुबह का थोड़ा सा समय मिलता है, या फिर दोपहर को जब खाना खाने घर आते हैं या फिर रात के 12 बजे के बाद का थोड़ा सा समय। अब इतने कम समय में जितना हो सकता है लिखते और पढ़ते हैं साथ ही कोशिश करते हैं कि दो-चार टिप्पणियां अच्छे लेखों में चिपका दें। कई लेख इतने अच्छे होते हैं कि जब उन पर टिप्पणी करने का समय नहीं मिल पाता है तो दिन भर बेचैनी रहती है। कोशिश करते हैं कि उस लेख पर देर रात तक ही सही समय निकाल कर अपने विचार दे दें। कभी समय मिल जाता है तो खुशी होती है, नहीं मिलता है तो दुख होता है। अब वक्त के आगे किसकी चली है जो हमारी चलेगी।

ऐसे में सोचते हैं कि चलो यार एक दिन तो जरूर ऐसा वक्त आएगा जब हमारे पास समय ही समय होगा। यानी जब 60 के बाद कोई काम नहीं होगा तो ब्लाग जगत ही अपना सबसे बड़ा यार होगा। क्या सोचते हैं आप लोग ठीक बात है न।

34 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 08:55:00 am 2009  

चलो इसी बात पे दस टिप्पणी की सौगात लो-जब साठ के हो जाओगे तो टाईम पास करने के लिए किराना दुकान खोल लेना, गद्दी बैठे-बैठे टीपना- हा हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 08:55:00 am 2009  

चलो इसी बात पे दस टिप्पणी की सौगात लो-जब साठ के हो जाओगे तो टाईम पास करने के लिए किराना दुकान खोल लेना, गद्दी बैठे-बैठे टीपना- हा हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 08:55:00 am 2009  

चलो इसी बात पे दस टिप्पणी की सौगात लो-जब साठ के हो जाओगे तो टाईम पास करने के लिए किराना दुकान खोल लेना, गद्दी बैठे-बैठे टीपना- हा हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 08:55:00 am 2009  

चलो इसी बात पे दस टिप्पणी की सौगात लो-जब साठ के हो जाओगे तो टाईम पास करने के लिए किराना दुकान खोल लेना, गद्दी बैठे-बैठे टीपना- हा हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 08:55:00 am 2009  

चलो इसी बात पे दस टिप्पणी की सौगात लो-जब साठ के हो जाओगे तो टाईम पास करने के लिए किराना दुकान खोल लेना, गद्दी बैठे-बैठे टीपना- हा हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 08:55:00 am 2009  

चलो इसी बात पे दस टिप्पणी की सौगात लो-जब साठ के हो जाओगे तो टाईम पास करने के लिए किराना दुकान खोल लेना, गद्दी बैठे-बैठे टीपना- हा हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 08:55:00 am 2009  

चलो इसी बात पे दस टिप्पणी की सौगात लो-जब साठ के हो जाओगे तो टाईम पास करने के लिए किराना दुकान खोल लेना, गद्दी बैठे-बैठे टीपना- हा हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 08:56:00 am 2009  

चलो इसी बात पे दस टिप्पणी की सौगात लो-जब साठ के हो जाओगे तो टाईम पास करने के लिए किराना दुकान खोल लेना, गद्दी बैठे-बैठे टीपना- हा हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 08:56:00 am 2009  

चलो इसी बात पे दस टिप्पणी की सौगात लो-जब साठ के हो जाओगे तो टाईम पास करने के लिए किराना दुकान खोल लेना, गद्दी बैठे-बैठे टीपना- हा हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 08:56:00 am 2009  

ये हो गई दसवीं टिप्पी-चलो इसी बात पे दस टिप्पणी की सौगात लो-जब साठ के हो जाओगे तो टाईम पास करने के लिए किराना दुकान खोल लेना, गद्दी बैठे-बैठे टीपना- हा हा हा हा

राजीव तनेजा शुक्र नव॰ 13, 09:03:00 am 2009  

मैँ तो सोच रहा हूँ कि ठेके पे दो-चार बन्दे रख लूँ अपने नाम से टिपियाने के लिए लेकिन डर है कि कहीं मेरी गैर मौजूदगी में उन्होंने अपना ब्लॉग ही कहीं बना लिया तो लेने के बजाय देने ना पड़ जाएँ..

माल-मत्ता तो मुझसे वसूलेंगे और टी.ऑर.पी अपने ब्लॉग की बढाएँगे :-(

संगीता पुरी शुक्र नव॰ 13, 09:27:00 am 2009  

मेरा ब्‍लाग तो आपके कंप्‍यूटर में खुलता ही नहीं .. इसलिए रिटायरमेंट के बाद भी आप टिप्‍पणियां करें .. तो मुझे तो कोई फायदा होने से रहा .. आज 7 बजे सुबह ब्‍लागवाणी के टिप्‍पणी वाली जगह पर .. जितनी टिप्‍पणियां समीर जी की थी .. उससे एक चौथाई से भी कम बाकी सारे ब्‍लागरों को मिलाकर होंगी .. वैसे मैने भी टिप्‍पणी करने में अपना स्‍थान बनाने की कोशिश की थी .. पर इतनी आलोचना होने लगी .. कि बंद ही कर दिया .. अभी मेरा स्‍वास्‍थ्‍य और ब्राडबैंड भी खास परेशान कर रहा है .. ईश्‍वर समीर जी का यह उत्‍साह बनाए रखे !!

guru शुक्र नव॰ 13, 09:43:00 am 2009  

शर्मा जी का अंदाज झकास है गुरु
इसलिए मैं भी हो जाता हूं शुरू
पर समीर लाल तो समीर लाल हैं

guru शुक्र नव॰ 13, 09:43:00 am 2009  

शर्मा जी का अंदाज झकास है गुरु
इसलिए मैं भी हो जाता हूं शुरू
पर समीर लाल तो समीर लाल हैं

guru शुक्र नव॰ 13, 09:43:00 am 2009  

शर्मा जी का अंदाज झकास है गुरु
इसलिए मैं भी हो जाता हूं शुरू
पर समीर लाल तो समीर लाल हैं

guru शुक्र नव॰ 13, 09:43:00 am 2009  

शर्मा जी का अंदाज झकास है गुरु
इसलिए मैं भी हो जाता हूं शुरू
पर समीर लाल तो समीर लाल हैं

guru शुक्र नव॰ 13, 09:43:00 am 2009  

शर्मा जी का अंदाज झकास है गुरु
इसलिए मैं भी हो जाता हूं शुरू
पर समीर लाल तो समीर लाल हैं

guru शुक्र नव॰ 13, 09:43:00 am 2009  

शर्मा जी का अंदाज झकास है गुरु
इसलिए मैं भी हो जाता हूं शुरू
पर समीर लाल तो समीर लाल हैं

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 10:26:00 am 2009  

चलो आज तुम्हारे भी पर लगा देते है,
टिप्पणियों का रिकार्ड ही बना देते है,
तो गुरु हो जाओ शुरु-नई दुकान है कम से कम
दस-द्स की बोहनी तो कराओ-हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 10:26:00 am 2009  

चलो आज तुम्हारे भी पर लगा देते है,
टिप्पणियों का रिकार्ड ही बना देते है,
तो गुरु हो जाओ शुरु-नई दुकान है कम से कम
दस-द्स की बोहनी तो कराओ-हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 10:26:00 am 2009  

चलो आज तुम्हारे भी पर लगा देते है,
टिप्पणियों का रिकार्ड ही बना देते है,
तो गुरु हो जाओ शुरु-नई दुकान है कम से कम
दस-द्स की बोहनी तो कराओ-हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 10:26:00 am 2009  

चलो आज तुम्हारे भी पर लगा देते है,
टिप्पणियों का रिकार्ड ही बना देते है,
तो गुरु हो जाओ शुरु-नई दुकान है कम से कम
दस-द्स की बोहनी तो कराओ-हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 10:26:00 am 2009  

चलो आज तुम्हारे भी पर लगा देते है,
टिप्पणियों का रिकार्ड ही बना देते है,
तो गुरु हो जाओ शुरु-नई दुकान है कम से कम
दस-द्स की बोहनी तो कराओ-हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 10:27:00 am 2009  

चलो आज तुम्हारे भी पर लगा देते है,
टिप्पणियों का रिकार्ड ही बना देते है,
तो गुरु हो जाओ शुरु-नई दुकान है कम से कम
दस-द्स की बोहनी तो कराओ-हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 10:27:00 am 2009  

चलो आज तुम्हारे भी पर लगा देते है,
टिप्पणियों का रिकार्ड ही बना देते है,
तो गुरु हो जाओ शुरु-नई दुकान है कम से कम
दस-द्स की बोहनी तो कराओ-हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 10:27:00 am 2009  

चलो आज तुम्हारे भी पर लगा देते है,
टिप्पणियों का रिकार्ड ही बना देते है,
तो गुरु हो जाओ शुरु-नई दुकान है कम से कम
दस-द्स की बोहनी तो कराओ-हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 10:27:00 am 2009  

चलो आज तुम्हारे भी पर लगा देते है,
टिप्पणियों का रिकार्ड ही बना देते है,
तो गुरु हो जाओ शुरु-नई दुकान है कम से कम
दस-द्स की बोहनी तो कराओ-हा हा हा

ललित शर्मा शुक्र नव॰ 13, 10:27:00 am 2009  

चलो आज तुम्हारे भी पर लगा देते है,
टिप्पणियों का रिकार्ड ही बना देते है,
तो गुरु हो जाओ शुरु-नई दुकान है कम से कम
दस-द्स की बोहनी तो कराओ-हा हा हा

Anil Pusadkar शुक्र नव॰ 13, 10:36:00 am 2009  

वैसे भी उड़न खटोले से कम तो है नही हमारा राजकुमार।एक पल मे यंहा दूसरे पल कंहा?राजकुमार वैसे राजीव का आईडिया बढिया है।

खुशदीप सहगल शुक्र नव॰ 13, 11:09:00 am 2009  

ललित भाई,
आपने मारूति का एड ज़रूर देखा होगा...
पिता अपने बेटे से कहता है...ओ काके बस कर यार...
बेटा...डैडी कि करां पेट्रोल ही खत्म नहीं होंदा...

लगता है आपकी टिप्पणियों वाला पेट्रोल गुरू ने भी अपनी गाड़ी में डलवा लिया है....

जय हिंद....

Dr. Kumarendra Singh Sengar शुक्र नव॰ 13, 01:46:00 pm 2009  

ham 10 ya 20 ya fir aur jyada TIPPANI nahin denge.
hamaare yahan kahawat hai ki 12 varsh baad to GHOORE ke bhi din firate hain, ham bhi apne din firne ka intezar kar rahe hain aap bhi hamaare sath aaiye.

श्रीश पाठक 'प्रखर' शुक्र नव॰ 13, 04:59:00 pm 2009  

बचपना जाता नहीं क्या करे.....लोग..

Udan Tashtari शुक्र नव॰ 13, 05:47:00 pm 2009  

बस यही स्नेह तो उर्जा देता है. आप निश्चिंत हो जितना भी बन पड़े, उतना ही करिये मगर प्रोत्साहन करिये जरुर. शुभकामनाएँ.

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