राजनीति के साथ हर विषय पर लेख पढने को मिलेंगे....

मंगलवार, नवंबर 24, 2009

काश एक बार वो फिर मिल जाती....


न जाने कौन थी, वो खुबसूरत हसीना

मुश्किल कर दिया जिसने हमारा जीना ।।

मिली थी हमें एक सफर के दरमियान

पर कर न सके हम उससे पहचान ।।

करके अपनी कातिल नजरों के वार

कहीं रास्ते में ट्रेन से उतर गई यार ।।

दीवाना वो हमें अपना बना गई

हमारे दिल में अपना घर बसा गई ।।

दिल में उसकी तस्वीर बस गई है

लगता है हमारे दिल में समा गई है ।।

हम अपने दिल की भावना उसे बताएं कैसे

इतने बड़े जहांन में उसे पाएं कैसे ।।

काश हमें एक बार फिर वो मिल जाती

हमारी रूठी तकदीर संवर जाती।।

कर लेते पूरा अपने दिल का सपना

बना लेते सदा के लिए उसे अपना

(नोट: यह रचना हमारी 20 साल पुरानी डायरी की है)

10 टिप्पणियाँ:

Suman मंगल नव॰ 24, 07:04:00 am 2009  

बना लेते सदा के लिए उसे अपना.nice

मनोज कुमार मंगल नव॰ 24, 07:09:00 am 2009  

आत्माभिव्यक्ति, बधाई।

M VERMA मंगल नव॰ 24, 07:23:00 am 2009  

वाह क्या बात है!!
यादे और टीसे फिर फिर उभरती हैं.

Udan Tashtari मंगल नव॰ 24, 08:34:00 am 2009  

२० साल पहले...चलो, अब छोड़ो!! आगे की सुध लो जो साथ है सो है!

Vivek Rastogi मंगल नव॰ 24, 08:46:00 am 2009  

कविता बहुत अच्छी है, और नोट डालकर अच्छा किया नहीं तो हम तो कुछ ओर ही समझ रहे थे ऊपर से नीचे पढ़ते आते समय :)

जी.के. अवधिया मंगल नव॰ 24, 08:49:00 am 2009  

जीवन में वह था एक कुसुम,
थे उस पर नित्य निछावर तुम,
यह सूख गया तो सूख गया,
मधुबन की छाती को देखो,
सूखीं इसकी कितनी कलियाँ
मुरझाईं कितनीं वल्लरियाँ,
जो मुरझाईं फिर कहाँ खिलीं?
पर बोलो सूखे फूलों पर,
कब मधुबन शोर मचाता है?

जो बीत गई सो बात गई।

"हरिवंशराय ‘बच्चन’"

Anil Pusadkar मंगल नव॰ 24, 10:09:00 am 2009  

मार खाये गा ना बे,बहुरानी के हाथ अगर डायरी लग गई तो बचेगा नही,गुनाह के सारे सबूत साथ मे ही रखे हुये है।हा हा हा…………।राजकुमार याने तू शुरू से ही रोमांटिक था,डाऊट तो होता था मगर तब ये डायरी का पता नही था।यादें ही तो इंसान का सबसे अनमोल खज़ाना है राजकुमार्।

Rajey Sha मंगल नव॰ 24, 01:05:00 pm 2009  

जनाब कोई न कोई हसीना तो मि‍ल ही गयी होगी, बीस बरस बीत चुके हैं।
अब उस पर कुछ नया लि‍खना चाहि‍ये, नहीं ?

asif ali,  बुध नव॰ 25, 12:35:00 am 2009  

वाह क्या बात है!!

Sanjeet Tripathi बुध फ़र॰ 03, 01:23:00 am 2010  

by god. matlab ye ki 20 sal pahle bhi aap aaj ajise hi romantic n flirt the?
;)

;)
;)
;)

Related Posts with Thumbnails

ब्लाग चर्चा

Blog Archive

मेरी ब्लॉग सूची

  © Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP