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शनिवार, मई 09, 2009

कितना बदल गया इंसान, दोस्त-दोस्त न रहा...

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान.. कितना बदल गया इंसान..., दोस्त-दोस्त न रहा वाली बातें आज के जमाने में ज्यादा देखने को मिल रही है। कदम-कदम पर बस धोखा और फरेब के सिवाए कुछ नहीं है। जो इंसान किसी का भला करने की सोचता है, वहीं छला जाता है। अब यह बात अलग है कि छले जाने के बाद भी लोग किसी की मदद करना नहीं छोड़ते हैं। हर कदम पर ऐसे-ऐसे किस्से सुनने को मिलते हैं जिससे लगता है कि आखिर आज इंसान किस दिशा में जा रहा है और क्यों इतना स्वार्थी हो गया है कि सिवाए उसे अपने कुछ और नजर ही नहीं आता है।

कल ही की बात है हम खेल बिरादरी के कुछ लोगों के साथ बैठे थे तो हमें अपने खेल अधिकारी मित्र के बारे में किसी ने बताया कि यार उसने अपने साथ काम करने वाले एक और खेल अधिकारी का भला करने के लिए उसे भी स्पोट्र्स में पीएचडी करने का रास्ता दिखाया तो उस अधिकारी ने उसका ही रास्ता बंद करने का काम किया। जब हमने उस खेल से जुड़े बंदे से अपने मित्र का किस्सा बताने के लिए कहा तो उसने जो बातें बताई वो कुछ इस तरह से हैं कि हमारे वे मित्र एक कॉलेज में खेल अधिकारी है। हमारे इस मित्र की एक आदत है कि वे हमेशा किसी की भी मदद करने के लिए तैयार हो जाते हैं। हमें आज भी याद है वह दिन जब उन्होंने छत्तीसगढ़ मे पहली बार मोटर स्पोट्र्स का एक बड़ा आयोजन किया था और कारों का एक बड़ा काफिला रायपुर से मैनपाट के लिए गया था।


जिनके जीवन में डॉ. फरिश्ता जैसा इंसान फरिश्ता बनाकर आया हो वो इंसान भला कैसे किसी की मदद नहीं करेगा। ऐसे में जबकि उनको स्पोट्र्स में पीएचडी करने का ख्याल आया तो उन्होंने अपने साथी उन खेल अधिकारी को भी इसमें शामिल कर लिया जिस खेल अधिकारी ने उनकी स्थाई नौकरी को एक बार हथिया लिया था। इसके बाद भी उन्होंने उस बात को भूलकर अपने साथी को इसलिए डीएचडी करने में मदद करने का काम किया कि शायद अब वह बदल गया हो, लेकिन यहां पर भी एक बार उनको फिर धोखा मिला।

ऐसे में जबकि इस काफिले की कुछ कारें नहीं दिख रही थी तो हमारे वे मित्र इस कारों को जब ढूढने के लिए निकले तो उनका ऐसा एक्सीटेंड हुआ कि लगा कि उनका बचना मुश्किल है। उनकी तो पूरी शक्ल ही बिगड़ गई थी। लेकिन कहते हैं न कि जो इंसान किसी की सच्चे दिल से मदद करता है उसकी मदद करने वाला भगवान होता है जो किसी न किसी रूप में सामने आता है। ऐसे में हमारे मित्र के जीवन में उस समय शहर के एक डॉ. ए. फरिश्ता वास्ताव में फरिश्ता बनकर आए और उन्होंने हमारे उन मित्र का न सिर्फ जीवन बचाया बल्कि उनकी शक्ल को भी वापस पुराने रूप में लाने का काम किया। आज हमारे वे मित्र पुराने रूप में हैं।
जिनके जीवन में डॉ. फरिश्ता जैसा इंसान फरिश्ता बनाकर आया हो वो इंसान भला कैसे किसी की मदद नहीं करेगा। ऐसे में जबकि उनको स्पोट्र्स में पीएचडी करने का ख्याल आया तो उन्होंने अपने साथी उन खेल अधिकारी को भी इसमें शामिल कर लिया जिस खेल अधिकारी ने उनकी स्थाई नौकरी को एक बार हथिया लिया था। इसके बाद भी उन्होंने उस बात को भूलकर अपने साथी को इसलिए पीएचडी करने में मदद करने का काम किया कि शायद अब वह बदल गया हो, लेकिन यहां पर भी एक बार उनको फिर धोखा मिला। हमारे मित्र ने अपने साथी के लिए न सिर्फ एक गाईड का इंतजाम किया, बल्कि उनके कहने से ही उनको को-गाईड भी मिला। इतना सब करने वाले इंसान के साथ उस अधिकारी ने यह किया कि विवि में सेटिंग करके उनकी थीसिस गायब करवा दी। इसी के साथ एक और खेल अधिकारी की भी थीसिस उन्होंने गायब करवा दी। हमारे मित्र सहित कुल तीन ने पीएचडी के लिए थीसिस जमा की थी। उस कथित खेल अधिकारी को पीएचडी लेने की इतनी जल्दी है कि वे लंदन गए अपने गाईड का भी इंतजार नहीं किया और को-गाईड को लेकर वाइवा करवा लिया। उनकी सारी करतूत जानकर हमारे वे मित्र काफी दुखी है और सोचने लगे है कि क्या वास्तव में किसी की भी मदद करने वालों का यही हश्र होता है।

21 टिप्पणियाँ:

ajay शनि मई 09, 09:09:00 am 2009  

दूसरों की मदद करने वालों का कभी बुरा हो ही नहीं सकता है मित्र। जो आदमी मदद करने वाले की कदर नहीं करता है वह एक दिन जरूर गड्ढे में जाता है।

ranju शनि मई 09, 09:21:00 am 2009  

आज की स्वार्थी दुनिया में किसी से कैसे यह उम्मीद की जा सकती है कि वह अपने फायदे के लिए दूसरे को किनारे लगाने की मानसिकता छोड़ सकता है। ऐसे स्वार्थी लोगों से आज बचने की जरूरत है। एक बार जो आदमी धोखा देता है, वह बाद में न दे ऐसा बहुत कम होता है। धोखेबाजों को मदद करने से कोई फायदा नहीं होता है।

pranav शनि मई 09, 09:28:00 am 2009  

अगर आपके दोस्त नेक इंसान नहीं होते तो क्या उनको डॉ. फरिश्ता जैसा फरिश्ता नहीं मिलता। अब इस दुनिया में कुछ बुरे इंसान है तो क्या इंसान अपनी मदद करने की फितरत को बदले दे। मदद करने वाले का सदा भला होता है दोस्त, लगे रहो

guru शनि मई 09, 09:41:00 am 2009  

बुरे काम का बुरा नतीजा सुन भाई दोस्त सुनो भतीजा... ठीक है न गुरु

Ujjwal शनि मई 09, 09:50:00 am 2009  

किसी विद्वान ने कहा है की मुर्ख से किनारा करो, उसका खुला विरोध नहीं!!! क्यूंकि जब वो अपनी मुर्खता से लैस होकर तुम्हारे सामने आ खडा होगा तब तुम्हारा सारा ज्ञान भी तुम्हे बचा नहीं पायेगा!!!

उज्जवल दीपक
मुंबई

बेनामी,  शनि मई 09, 10:06:00 am 2009  

भगवान ही जाने ऐसे लोगो को, जिनका दंभ एवं अंहकार मदद करनेवाले को ही मदद के बाद उन्ही को धकेलने का प्रयास करते है. ऐसे स्वार्थी लोगो को भगवान जरूर सबक देते है उपरवाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं.उपरवाले की लाठी चलने की देर है.

anu शनि मई 09, 10:41:00 am 2009  

डा. फरिश्ता जैसे फरिश्तों की ही जरूरत है आज की दुनिया को। जब तक ऐसे मदद करने वाले दुनिया में हैं अच्छे लोगों की मदद होती रहेगी। अच्छे लोगों का स्वार्थी कुछ बिगाड़ नहीं सकते हैं, कुछ पलों के लिए जरूर परेशानी होती है, पर आगे रास्ता निकल ही आता है।

बेनामी,  शनि मई 09, 10:49:00 am 2009  

पापा करने वालों को एक दिन सजा जरूर मिलती है, कहते हैं न कि सौ दिन सोनार का यानी चोर का और एक दिन लोहारा का यानी .... बाकी सब समझदार हैं

Anil Pusadkar शनि मई 09, 11:05:00 am 2009  

विष्णु तो समझ मे आ गया राजकुमार ये विष्णु का दोस्त कौन सा है?

बेनामी,  शनि मई 09, 11:10:00 am 2009  

ऐसे स्वार्थी लोगो को चुन चुन कर ......................यह लोग ऐसे नहीं सुधरेंगे , इनकी फितरत ही ऐसी है शायद परवरिश भी.इनको तो सबके सामने जुटा पड़ना चाहिए.राजकुमार जी आपके मित्र को बोलिए उस स्वार्थी दोस्त को सबके सामने जूता मारे, और हो सके तो आपकी ब्लॉग की प्रिंट निकाल कर उसको भेज दे.वैसे खुदा आपके मित्र की मदद करे और उसे हमेशा खुश रखे.
अरबाज़

Nirmla Kapila शनि मई 09, 01:11:00 pm 2009  

ीऐसी ही है ये दुनिया अच्छे बुरे सब तरह के लोग मिलेम्गे विजय हमेशा सच्चे की होती है

बेनामी,  शनि मई 09, 01:46:00 pm 2009  

Nice story to quote.
Let mr selfish do what so ever he feels better,and than the Almighty god will do something very good for him.Very Good.The very best.
u all know whats gods ----- good,better,best.Hope Mr. Rajkumar will have a followup of this trajic story....................
Rupali Mishra

विनय शनि मई 09, 02:02:00 pm 2009  

प्रथम टिप्पणी में अजय जी की बात से पूर्णतया सहमत हूँ

बेनामी,  शनि मई 09, 05:26:00 pm 2009  

धोखा देने वाले लोगों को नाम लिखने से परहेज क्यों मित्र ऐसे घटिया लोगों का नाम जग-जाहिर होना चाहिए। ऐसे लोगों को जितनी लानत दी जाए कम है। भविष्य में कभी ऐसा कोई मामला सामने लाए तो जरूर ऐसे गंदे लोगों का नाम लिखे।

neha शनि मई 09, 05:29:00 pm 2009  

डॉ. फरिश्ता और आपके मित्र जैसे मदद करने वालों की ही वजह से यह कायनात कायम है। स्वार्थी लोगों को किनारे करके अच्छे लोगों को तरफ देखना चाहिए

बेनामी,  शनि मई 09, 05:44:00 pm 2009  

एक बेनामी मित्र ने सही बात कही है कि स्वार्थियों की चुन-चुन कर बजानी चाहिए। क्योंकि ऐसे आदमी ही पूरे समाज और देश को गंदा कर रहे हैं। यह अपने देश का दुर्भाग्य है यहां हर दूसरा इंसान स्वार्थी है।
संजय कुमार भोपाल

rajesh patel शनि मई 09, 06:00:00 pm 2009  

अजय जी के बातों से हम भी सहमत हैं

vijaj शनि मई 09, 06:22:00 pm 2009  

ऐसे लोगो को कुछ नहीं करना चाहिए बस जहा मिले वाही पूरे समाज के द्वारा बायकाट किया जाना चाहिए .राजकुमार जी सेल्फिश और लालची खेल अधिकारी का नाम ओपन कर दीजिये ,और उसके आसपास के लोगो को भी खुल कर बताने का कष्ट करिए.अपने मित्र की हिम्मत बढाइये.
विजय

बेनामी,  शनि मई 09, 08:01:00 pm 2009  

जो स्वार्थी जूते खाने के लायक हैं ऐसे लोगों का नाम न बताने का क्या फायदा। हमारे साथी ठीक कह रहे हैं कि ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। जो लोगों अपनी मदद करने वालों के नहीं होते हैं ऐसे लोगों को समाज से बाहर कर देना चाहिए। सभी को ऐसे लोगों की जानकारी होनी चाहिए ताकि ऐसे सांपों से लोग सतर्क रह सके। संभव हो तो उस आदमी का नाम जरूर उजागर करें।

rajni रवि मई 10, 12:36:00 am 2009  

महोदय आपको हमारी सलाह है कि आप अपने मित्र को सलाह दें कि वे इस मामले को जरूर पुलिस तक ले जाएँ और उन सबका कच्चा चिट्ठा खोले जो इस मामले में उस खेल अधिकारी के साथ है। किसी की थीसिस गायब करवाना बहुत बड़ा अपराध है। ऐसे अपराधियों को खुला छोडऩे समाज के लिए घातक है।

बेनामी,  रवि मई 10, 12:47:00 am 2009  

थीसिस गायब करवाने वाले को हमारी तरफ से भी दस जूते मारना, लेकिन कभी किसी की मदद करने की आदत मत छोडऩा। मदद करने वाले इंसानों से ही इस जहांन का गुलशन आबाद है मेरे दोस्त

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