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गुरुवार, मई 14, 2009

टोनहियों के साथ लंबा सफर

आज हम जो पोस्ट लिखने जा रहे हैं, शायद उस पर बहुत कम लोग यकीन करें। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इस संसार में कुछ शैतानी शक्तियां भी हैं जिनसे किसी न किसी का सामना हो जाता है। ऐसी ही शैतानी शक्तियों में टोनही और टोनहा का सुमार होता है। अपने छत्तीसगढ़ में टोनही के बारे में ज्यादा घटनाएं सामने आती हैं। हम जो लिखने जा रहे हैं, वह कोई कहानी या किस्सा नहीं है एक सच्चाई है जिस पर यकीन करने का हमारा भी मन नहीं होता है। यकीन हम तब करते जब वास्तव में कोई टोनही बिलकुल हमारे करीब आ जाती। हम तो ऐसा चाहते थे, पर ऐसा संभव नहीं हो सका। हमने कई टोनहियों के साथ लंबा सफर गरियाबंद से लेकर राजिम तक का रात के अंधेरे में तय किया है। हमारे साथ जो मित्र थे उनकी हालत पलती हो गई थी, उनको तो टोनही का नाम सुनने के बाद होश ही नहीं था।


बात आज से करीब तीन साल पुरानी है। प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने रायपुर से कोई 100 किलो मीटर की दूरी पर गरियाबंद में खेलों का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण शिविर लगाया था। इस शिविर की रिपोर्टिंग करने के लिए हम अपने एक साथी पत्रकार कमलेश गोगिया के साथ हमारी मोटर सायकल से वहां गए। दोपहर को वहां पहुंचने के बाद शाम को खिलाडिय़ों का प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ हुआ। हमने खिलाडिय़ों से बात की और फिर खेल आयुक्त राजीव श्रीवास्तव के साथ खेल अधिकारी राजेन्द्र डेकाटे के कहने पर रात का सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के लिए रूक गए। पहले यह तय हुआ था कि हम लोग करीब 9 बजे तक कार्यक्रम देखकर खाना खाएंगे और निकल जाएंगे। लेकिन खिलाड़ी बच्चों ने ऐसे-ऐसे कार्यक्रम दिए कि हम लोगों का उठाने का मन ही नहीं हुआ और अंत में हुआ यह की रात के 12.30 बजे गए। ऐसे में हम लोगों से खेल आयुक्त श्री श्रीवास्तव ने अपनी कार में साथ चलने के लिए कहा और कहा कि हमारी मोटर सायकल सुबह मंगवा लेंगे। लेकिन हमने इंकार कर दिया, हमें रात में अपनी मोटर सायकल से सफर करने में मजा आता है। हम प्रारंभ से ही रोमांचकारी सफर के शौकीन रहे हैं। हमने दो बार उत्तर भारत की सायकल से भी यात्रा की है, इनकी बातें फिर कभी। हमने अपने मित्र कमलेश से कहा कि तुम चाहो तो कार में चले जाओ, पर कमलेश ने भी इंकार कर दिया और कहा कि नहीं भईया हम साथ में आएं हैं तो साथ ही जाएंगे। मैं आपको अकेले कैसे छोड़ कर जाऊंगा। इधर श्री डेकाटे ने हमें रात में वहीं रूकने के लिए बहुत कहा पर हम नहीं रूके। हमें गांव के लोगों ने कहा भी कि गरियाबंद से राजिम के बीच का सफर रात को ठीक नहीं है, उन्होंने इशारों में कहा भी कि टोनही-टकारी का भरोसा नहीं है। लेकिन हमने किसी की बात नहीं सुनी और हम लोग अंतत: वहां से रात को 12.45 पर निकले।

जब हम लोग गरियाबंद से निकले थे तब हमें मालूम नहीं था कि हम एक ऐसे रोमांचकारी सफर पर जा रहे हैं। रोमांचकारी इसलिए कि हमारे सफर में करीब 30 किलो मीटर तक रात के अंधेरे में एक नहीं कई टोनहियों का साथ रहा। अब यह बात अलग है कि वो दूर में खेत में चल

टोनही के बारे में छत्तीसगढ़ में एक कानून भी बना है कि किसी को टोनही कहते हुए प्रताडि़त नहीं किया जा सकता है। अक्सर लोग गांवों में किसी से दुश्मनी से निकालने के लिए किसी पर भी टोनही होने का आरोप लगाकर उसके साथ कुछ भी कर लेते हैं। कई बार टोनही के नाम पर प्रताडऩा सीमाएं लांघ जाती है।

ही
थीं। हमने बचपन से टोनहियों के बारे में सुना है, लेकिन इनको कभी करीब से देखने का मौका नहीं मिला है, हम तो चाह रहे थे कि कोई टोनही करीब आए तो हम भी देखें कि आखिर टोनही क्या बला होती है। लेकिन हमारी तमन्ना पूरी नहीं हुई। इधर रोड के दोनों तरफ जिस तरह से आग के गोले जल रहे थे और हमारे साथ-साथ तेजी से चल रहे थे उससे हमारे मित्र कमलेश ने अंत में पूछा लिया कि भईया वो कहीं टोनही तो नहीं है। हमारे ख्याल से छत्तीसगढ़ का हर रहवासी टोनही के बारे में जानता है। हमने जब कमलेश को बताया कि हां वो सब हमें भी टोनही लग रहीं हैं तो कमलेश की हालत खराब हो गई। इसके बारे में उसने हमें बाद में बताया था कि उसको तो टोनही के बारे में सुनने के बाद होश ही नहीं था। उन टोनहियों या फिर चाहे उनको जो कहा जाए उनका साथ राजिम प्रारंभ होने के बाद ही छुटा।
टोनही के बारे में लोग तरह-तरह की बातें बताते हैं, लेकिन जहां तक हमारा मानना है कि उसे किसी ने अब तक देखा नहीं होगा। हमने जो टोनही के बारे में सुना है उसके मुताबिक यह एक तंत्र साधन है जिसको सीखने वाली महिला को टोनही और पुरुष को टोनहा कहा जाता है। वैसे टोनहा के बारे में कम और टोनही के बारे में ज्यादा बातें होती हैं। इनके बारे में कुछ लोग कहते हैं कि यह रात को निकलती है और खेत-खलिहानों में ही विचरण करती है, यह कभी रोड को क्रास नहीं कर पाती है। दूर से वह जलती हुई दिखती है तो इसके बारे में लोग बताते हैं कि उसके मुंह से निकलने वाली लार ही आग के रूप में रहती है। इसी के साथ कहा जाता है कि वह जमीन से कुछ फीट ऊपर हवा में हवा की तरह की चलती है। अब इन बातों में कितनी सच्चाई है हम भी नहीं जानते हैं। लेकिन हमको दो-तीन बार रात के सफर में ऐसे दृश्य देखने का मौका मिला है जिसके बारे में लोगों की सुनाई बातों से आधार पर हम कह सकते हैं कि हमने जिनको दूर से देखा था वो टोनही थी और हमने उनसे साथ एक रोमांचकारी सफर तय किया। टोनही के बारे में छत्तीसगढ़ में एक कानून भी बना है कि किसी को टोनही कहते हुए प्रताडि़त नहीं किया जा सकता है। अक्सर लोग गांवों में किसी से दुश्मनी से निकालने के लिए किसी पर भी टोनही होने का आरोप लगाकर उसके साथ कुछ भी कर लेते हैं। कई बार टोनही के नाम पर प्रताडऩा सीमाएं लांघ जाती है। छत्तीसगढ़ में टोनही पर काफी कुछ लिखा भी गया है। हमारे एक साथ मित्र खेमराज देवांगन को इस पर शोध करने के लिए स्टेटसमैन अवार्ड के साथ राज्य की चंदूलाल चन्द्राकार फेलोशिप भी मिली है। उन्होंने एक पूरी पुस्तक टोनही भी लिखी है।

12 टिप्पणियाँ:

ajay गुरु मई 14, 08:53:00 am 2009  

भले आपने टोनही के बारे में लिखा है, पर यह बात सुखद है कि आप इसके अंधविश्वास में नहीं फंसे हैं। आपकी बातों से कहीं नहीं लगा है कि आप किसी टोनही के अस्तित्व को मानते हैं। अगर पढ़े-लिखे लोग भी अंधविश्वास में फंस जाएंगे तो फिर क्या होगा।

बेनामी,  गुरु मई 14, 08:59:00 am 2009  

क्या आपका सफर इतना ही रोमांचकारी था जैसा आपने लिखा है क्या आपको डर नहीं लगा कि अगर वह जिसे आप टोनही बता रहे हैं वह आपके सामने आ जाती तो आपका और आपके मित्र का क्या होता?
राहुल अग्रवाल भोपाल

राजकुमार ग्वालानी गुरु मई 14, 09:13:00 am 2009  

डरना तो हमने बचपन से ही नहीं सीखा मित्र, हम इतना जानते हैं कि मौत एक सच्चाई है और वह जब जहां आनी है आकर रहेगी, फिर किस बात का डर। अगर हमारी मौत किसी शैतानी शक्ति के हाथों लिखी होगी तो उसे कौन टाल सकता है। वैसे एक बात यह भी है कि न कि अपने गब्बर सिंह साहब कह भी गए है जो डर गया समझो मर गया।

guru गुरु मई 14, 09:17:00 am 2009  

कहां टोनही के चक्कर में फंस गए गुरु

बेनामी,  गुरु मई 14, 09:46:00 am 2009  

आज के आधुनिक जमाने में जादू-टोने और शैतानी शक्तियों के बारे में बातें करना महज एक अंधविश्वास से ज्यादा कुछ नहीं है। ऐसी बातों को बढ़ावा देने का काम नहीं करना चाहिए।

बेनामी,  गुरु मई 14, 10:56:00 am 2009  

हमारा ऐसा मानना है कि तंत्र-मंत्र सब फालतू बातें हैं। लोग तंत्र-मंत्र की आड़ में ठगी का घंघा करते हैं। मीडिया में जितनी भी ऐसी खबरें छपती हैं उसका फायदा फर्जी तांत्रिक ही उठाते हैं। हमारा मानना है कि मीडिया को ऐसी खबरों से परेहज करना चाहिए।

मनोहर यादव लखनऊ

anu गुरु मई 14, 10:59:00 am 2009  

छत्तीसगढ़ में टोनही के नाम पर किस तरह से महिलाओं को प्रताडि़त किया जाता रहा है, इसके बारे में भी जरूर लिखे। छत्तीसगढ़ में कई गांव ऐसे है जहां पर महिलाओं को टोनही के संदेह में न जाने क्या-क्या सहना पड़ता है। यह बात सच है कि आज तक किसी ने किसी टोनही को नहीं देखा है, लेकिन इतना जरूर है कि तंत्र-मंत्र के दम पर कई घटनाएं हुई हैं।

ranju गुरु मई 14, 01:44:00 pm 2009  

कभी आप अपनी सायकल यात्रा का रोमांच भी ब्लाग जगत में बांटने का प्रयास करें। आपके टोनहियों के साथ का सफर हमें भी रोमांचकारी लगी। क्या ऐसा सफर भी होता है?

pranav गुरु मई 14, 01:53:00 pm 2009  

टोनही के नाम पर प्रताडि़त करने वालों के लिए आपकी राज्य सरकार ने अगर कानून बनाया है तो इसके लिए सरकार बधाई की पात्र है।

रंजना गुरु मई 14, 03:23:00 pm 2009  

आपका रोमांचकारी यात्रा वृतांत बड़ा ही रोचक लगा....

तंत्र विद्या बकवास नहीं, कुछ लोग इसके नाम पर लोगों को ठगते हैं,यह सत्य है.परन्तु मंत्र तंत्र सचमुच प्रभावी होता है.तन्त्र का मतलब है युक्ति.....यदि इसका सकारात्मक उपयोग किया जाता है तो तांत्रिक तथा तंत्र से लाभावन्वित होने वाले दोनों का कल्याण होता है ,नहीं तो अहित करने में इस विद्या को प्रयुक्त करने वाले की बड़ी दुर्दशा होती है.

Anil Pusadkar गुरु मई 14, 11:37:00 pm 2009  

राजकुमार रात को घूमना बंद करो।

Udan Tashtari शुक्र मई 15, 06:47:00 am 2009  

बाकी तो खैर छोड़ो..बात है रोमांचकारी.

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