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शनिवार, दिसंबर 12, 2009

ये हैं खानाबदौश-जिनमें है काम करने का जोश





हमें एक दिन छत्तीसगढ़ की राजधानी से कोई 130 किलो मीटर दूर रायपुर जिले के कसडोल जाने का मौका मिला तो वहां से लौटते समय रास्ते में लवन पड़ा। वहां पर सड़क पर मजमा देखकर हमने अपनी कार रोकी और देखा कि वहां पर राजस्थान के ये खानाबदौश अपने पेट की खातिर किस तरह से काम करने का जोश दिखा रहे थे। इनके जोश को देखने पूरा गांव उमड़ पड़ा था। ये लोग लोहे के औजार बनाकर बेच रहे थे। ये खानाबदौश यहां हर साल आते हैं।

5 टिप्पणियाँ:

बेनामी,  शनि दिस॰ 12, 08:47:00 am 2009  

ऐसे खानाबदौसों से बच कर रहना चाहिए, इनके कारनामे सभी जानते हैं, दिन में मेहनत का काम करते हैं और को चोरी का काम।

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari शनि दिस॰ 12, 10:40:00 am 2009  

हां भईये ऐसे खानाबदेशों की कई टीमें छत्‍तीसगढ के गांवों में कृषि के औचार, बर्तन और मूर्तिंया बनाती नजर आती है वैसे ही पंजाबी लोहारों की टीमें भी गांवों में टीन के सामान बनाते नजर आते हैं.

पंकज शनि दिस॰ 12, 05:44:00 pm 2009  

चित्र कहते हैं एक कहानी और शब्द तो खैर कहते ही हैं.

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