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शुक्रवार, दिसंबर 11, 2009

लंबी चली चर्चा- कोकास जी से पूछे कितना हुआ खर्चा



भिलाई की ब्लागरों की चिंतन बैठक में जब हम लोग शरद कोकास जी के यहां गहन चिंतन करने के बाद होटल खाना खाने के लिए गए तो खाना खाने के बाद जब हम लोग वहां से अनिल पुसदकर जी के आने की सूचना पर बाहर निकले तो एक चौक के पास खड़े होकर सभी बतिया रहे थे, ऐसे में वहां पर हंसी मजाक वाले माहौल में जब हमने कहा कि लंबी चली चर्चा-कोकास जी से पूछे कितना हुआ खर्चा.. तो इस बात पर सभी हंस पड़े। हमारी यह हेडिंग खासकर कोकास जी को बहुत पसंद आई। हम तो दूसरे ही दिन इस हेडिंग के साथ एक पोस्ट लिखना चाह रहे थे, पर चिंतन बैठक की महत्वपूर्ण बातों को पहले लिखना जरूरी था और मौका मिला तो सोचा चलो इसको लिख ही लिया जाए नहीं तो अपने कोकास जी नाराज हो जाएंगे और कहेंगे कि राजकुमार तुम तो बस हेडिंग सुना देते हो उस पर कुछ लिखते नहीं हो।

छत्तीसगढ़ के करीब एक दर्जन ब्लागरों की एक चिंतन बैठक पिछले रविवार को अचानक भिलाई-दुर्ग में हुई थी। इस बैठक के बारे में सोचा नहीं गया था कि यह इतनी लंबी चलेगी। हम लोगों से सोचा था कि एक-दो घंटे बैठने के बाद खाना खाएंगे और रवाना हो जाएंगे। लेकिन जब हम ललित शर्मा जी के साथ शरद कोकास के निवास पर पहुंचे तो एक तो बैठक बहुत ज्यादा लंबी चली, फिर जब होटल जाकर खाना-खाने की योजना बनी तो कोकास जी के कम्प्यूटर की ललित शर्मा जी के पैन ड्राइव के कारण वाट लग गई। यह किस्सा हम पहले लिख चुके हैं। जैसे तैसे कोकास जी का कम्प्यूटर बीएस पाबला जी ने ठीक किया और हम लोग चल पड़े होटल की तरफ। होटल में बालकृष्ण अय्यर जी भी आए और थोड़ी देर रूकने के बाद अपने बैंक के लिए निकल गए, यह कहते हुए कि वे वापस आ रहे हैं। हम लोग जब होटल में खाने का आर्डर देने की तैयारी कर रहे थे तभी अनिल पुसदकर जी का फोन आया और उन्होंने अपने अंदाज में पूछा अबे कहां हैं? हमने बताया कि हम लोग दुर्ग के होटल में बैठे हैं। उन्होंने नाराजगी जताई कि हम लोगों ने उनको बताया नहीं और भिलाई आ गए। हमने उनसे कहा कि भईया जब आपकी तबीयत ठीक नहीं है तो फिर काहे परेशान हो रहेे हैं। अनिल जी के फोन आने की बात उधर अय्यर जी को मालूम हुई तो उन्होंने तपाक से अनिल जी से बात की। हमें बाद में मालूम हुआ कि वे दोनों पुराने मित्र हैं। अय्यर जी ने खबर दी कि अनिल जी आने वाले हैं।

अनिल जी के आने की सूचना मिलने पर हम लोगों ने खाना खाने के बाद उस चौक का रूख किया जहां पर अनिल जी आने वाले थे। हम लोग वहां पर खड़े होकर बतिया रहे थे और योजना भी बन रही थी कि क्या लिखना है। हमने तभी कहा कि सब सोचते रहेंगे और हम तो यहां से जाते ही एक पोस्ट लिख देंगे। लेकिन क्या लिखना है इसके लिए सामूहिक सहमति जरूरी थी। ऐसे में पहली पोस्ट और दूसरी पोस्ट तो तय हो गई थी। लेकिन इस बीच हमने पोस्ट लिखने की चर्चा के बीच में सबसे पहले कहा था कि लंबी चली चर्चा-कोकास जी से पूछे कितने हुआ खर्चा। यह हमने इसलिए कहा था क्योंकि होटल का बिल पटाने का काम कोकास जी ने किया था। अब होटल का बिल कितना देना पड़ा, यह तो कोई नहीं जानता सिवाए कोकास जी के। ऐसे में हमने यह बात मजाक में कही थी, हमारी इस बात पर जहां सबको हंसी आ गई, वहीं कोकास जी को यह हेडिंग जम गई। हमने उनसे वादा किया था कि इस हेडिंग पर एक पोस्ट जरूर लिखेंगे। आज वादा पूरा कर रहे हैं।

बहरहाल हम लोगों के हंसी-मजाक के बीच अनिल जी का आगमन हुआ और वहीं चौक पर ही एक ब्लागर मीट हो गई। न सिर्फ ब्लागर मीट बल्कि फोटो ग्राफी भी खूब हुई। चौक पर ही एक घंटे की चर्चा के बाद जहां ललित शर्मा और हम रायपुर के लिए निकल पड़े, वहीं कोकास जी अनिल जी के साथ अन्य मित्रों को लेकर अपने घर चले गए। कोकास जी के घर में उनकी बैठक कुछ समय चली। फिर सभा समाप्त हो गई। अब इस लंबी मैराथन बैठक में जो ऐतिहासिक फैसले हुए हैं वो धीरे-धीरे सामने आएंगे। एक साथ ब्लास्ट करना ठीक नहीं है। वैसे हमारे सीरियल ब्लास्ट शब्द पर कुछ मित्रों को आपति हुई है, अगर किसी अच्छी बात के लिए ब्लास्ट का उपयोग किया जाए तो क्या गलत है। ब्लास्ट खतरनाक होता है, यह तो सब जानते हैं लेकिन कोई ब्लास्ट सुखद भी हो सकता है हम इसका अहसास ब्लाग बिरादरी को करवाना चाहते हैं। तो आप लोग इंतजार करें ऐेसे सुखद ब्लास्टों का जो हम लोग लेकर आएंगे जरूर।

8 टिप्पणियाँ:

राजीव तनेजा शुक्र दिस॰ 11, 08:34:00 am 2009  

ब्लास्ट अगर सधे हाथों से एवं नियंत्रित तरीके से किए जाएँ तो नतीजा बढिया ही निकलेगा

Udan Tashtari शुक्र दिस॰ 11, 09:02:00 am 2009  

सुखद ब्लास्टों का बेसब्री से इन्तजार है भई/// जल्दी करो!!

atul kumar,  शुक्र दिस॰ 11, 10:31:00 am 2009  

सुखद ब्लास्टों का बेसब्री से इन्तजार है

suryakant gupta शुक्र दिस॰ 11, 01:16:00 pm 2009  

भाई राज कुमार जी आपका लिखना लाजमी है कि "कितना हुआ खर्चा"
भाई हम सदस्य ही इसके लिए तैयार नहीं होंगे तो मजा कैसे आएगा
कुछ उत्साह और उमंग से ही हमारे ब्लागरों की संख्या बढ़ेगी, हाँ जी जब अभी खर्चे की बात निकल ही चुकी है तो भैया अभी माहौल है
भरा गया है दिग्गजों द्वारा चुनाव का परचा
हो ही जाएगा वसूल जीत के आने के बाद सारा खरचा

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari शुक्र दिस॰ 11, 04:02:00 pm 2009  

लम्‍बे मैथरान बैठक के खरचे की चर्चा खूब रही.

ताऊ रामपुरिया शुक्र दिस॰ 11, 09:00:00 pm 2009  

अग्रिम बधाई लेलो जी सुखद ब्लास्टों की.

रामराम.

Anil Pusadkar शनि दिस॰ 12, 11:03:00 pm 2009  

वाह राजकुमार वाह!छा गये।

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