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शनिवार, दिसंबर 26, 2009

इस महिला की हिम्मत की दाद दें या....

हम सुबह-शाम जब भी प्रेस जाते हैं तो राजधानी रायपुर के लाखेनगर चौक के पास एक महिला के परिवार को देखते हैं। यह महिला बिंदास होकर घरेलू गैस की कालाबाजारी करती हैं और अपने पूरे परिवार का पेट भरती हैं। इस महिला में जो साहस है इस तरह की कालाबाजारी करने का उसको लेकर हम काफी समय से यही सोच रहे हैं कि इस महिला की हिम्मत की दाद देनी चाहिए या फिर उसके गलत काम करने के लिए उसको
धिक्कारना
चाहिए। हमें कुछ समझ नहीं आता है।


जब भी रास्ते में जाते हुए इस महिला के घर पर नजरें पड़ती हैं तो हम कई बार यह सोचते हैं कि यार इस जमाने में जब कई महिलाओं को पापी पेट की खातिर अपना जिस्म तक बेचना पड़ता है, ऐसे में अगर यह महिला अपने साहस के दम पर कोई ऐसा काम रही है जिसमें कम से कम उसको अपने जिस्म से समझौता नहीं कर पड़ रहा है तो लगता है कि महिला कुछ ग़लत नहीं कर रही है। आज के जमाने में काम करने वाली कितनी महिलाएं सुरक्षित हैं, हर तरफ उनको नोंचने के लिए बहशी बैठे हुए हैं, जो मौके की तलाश में रहते हैं कि कब किसका शोषण करने का मौका मिल जाए। ऐसे में यह महिला कम से कम कालाबाजारी करके अपने और अपने परिवार की लड़कियों को ऐसे बहशियों से तो बचाने में सफल रही हैं।

इस महिला के खिलाफ एक बार नहीं कई बार केस बन चुका है, पर फिर से इस महिला का परिवार यही काम करने लगता है। वैसे कालाबाजारी का काम करना आसान नहीं होता है, आज जबकि इस काम को करने में वक्त पडऩे पर बड़े-बड़े शूरमा घबरा जाते हैं तो एक महिला खुले आम मुख्य मार्ग पर अपने घर के सामने ऐसा काम कर रही है तो उसमें दम तो जरूर होगा।

इसमें कोई दो मत नहीं है कि महिला कालाबाजारी करने का जो काम कर रही है, उसके पीछे उसके घर चलाने की ही मजबूरी है। वरना गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार ऐसा काम करने की हिम्मत नहीं दिखाता है। हम ब्लाग बिरादरी के मित्रों से जानना चाहते हैं कि महिला के इस काम को ठीक समझा जाए या गलत।

3 टिप्पणियाँ:

परमजीत बाली शनि दिस॰ 26, 11:09:00 am 2009  

पता नही यह सही है या नही....लेकिन इस तरह के कामों में बिना मिली भगत के कुछ नही होता...।वैसे यदि इस से प्रेरणा ले कर और भी इसी काम में जुट गई तो देश के बंटाधार होता जाएगा....क्योकि मजबूरी का नाम लेकर गलत को सही नही माना जा सकता....

Dipti शनि दिस॰ 26, 04:04:00 pm 2009  

ये हमारे समाज की विडंबना है कि अगर महिला अकेली है तो उसे परिवार के भरन पोषण के लिए ग़लत तरीक़े भी अपनाने पड़ते हैं। लेकिन, मेरे मुताबिक़ ये काम भी ग़लत है। सिर्फ़ जिस्मफरोशी ही ग़लत नहीं हैं। अगर वो इतनी हिम्मती हैं तो उन्हें इमानदारी से और अपनी शर्तों पर कोई सही काम करना चाहिए।

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