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गुरुवार, अगस्त 06, 2009

चाहिए युवा खून


अचानक

सुबह-सुबह

दरवाजा खटका

दरवाजा खोलकर देखा

सामने एक अजनबी खड़ा था

किन्तु

चेहरा कुछ जाना-पहचाना था

हमने पूछा कौन हैं? किससे काम है?

जवाब मिला

मैं हूं लोकतंत्र

जिसकी हत्या कर दी गई है

हमने पूछा यहां क्यों आए हैं?

उसने कहा

मुझे तुम्हारी जरूरत है

मौत ने मुझसे कहा है

युवा खून ही तुम्हें

पुन: जीवन दे सकता है

7 टिप्पणियाँ:

saurabh गुरु अग॰ 06, 09:49:00 am 2009  

अपने देश में कहने को लोकतंत्र है, पर देखा जाए तो यहां के मंत्री अपने को राजा ही समझते हैं। गरीब जनता की सुनने वाला कोई नहीं है।

amit,  गुरु अग॰ 06, 09:58:00 am 2009  

युवा शक्ति ही बचा सकती है देश को।

sammer गुरु अग॰ 06, 10:25:00 am 2009  

लोकतंत्र की तो आजादी ले लेकर अब तक लगातार हत्या हो रही है।

pranav गुरु अग॰ 06, 01:29:00 pm 2009  

जिस देश में भ्रष्ट नेता रहेंगे उस देश का लोकतंत्र जिंदा कैसे रह सकता है।

chintu गुरु अग॰ 06, 01:46:00 pm 2009  

मौत से मुझसे कहा है
युवा खून ही तुम्हें
पुन: जीवन दे सकता है
लाजवाब

suman,  गुरु अग॰ 06, 04:32:00 pm 2009  

लोकतंत्र पर करार प्रहार किया है आपने कविता से

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