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बुधवार, अगस्त 26, 2009

मैं ट्रक और बस का टायर हूं

मैं ट्रक और बस का टायर हूं

ट्रक और बस मेरी हस्ती है

ट्रक और बस मेरी जवानी है

मुझसे पहले कितने टायर

आए और आकर चले गए

कुछ भस्ट होकर चले गए

कुछ पंचर होकर रह गए


मैं ट्रक और बस का टायर हूं

ट्रक और बस मेरी हस्ती है

ट्रक और बस मेरी जवानी है

कल और आएंगे सड़कों पे

चलने वाले कितने टायर

मुझसे बेहतर चलने वाले

मुझसे बेहतर दिखने वाले

क्यों कोई मुझको याद करे

क्यों कोई मुझको याद करे

मशरूफ जमाना मेरे लिए

क्यों वक्त अपना बर्बाद करे

मैं ट्रक और बस का टायर हूं

ट्रक और बस मेरी हस्ती है

ट्रक और बस मेरी जवानी है

(नोट: यह पैरोडी हमने स्कूल के जमाने में बनाकर स्कूल के वाषिक कार्यक्रम में सुनाई थी, आज अचानक याद आई तो इसे लिख दिया)।

11 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari बुध अग॰ 26, 07:32:00 am 2009  

बहुत अच्छा लगा पढ़ कर.


बेहतरीन..................

harseeta बुध अग॰ 26, 08:18:00 am 2009  

मुझसे पहले कितने टायर
आए और आकर चले गए
कुछ भस्ट होकर चले गए
कुछ पंचर होकर रह गए

लाजवाब

guru बुध अग॰ 26, 08:50:00 am 2009  

वाह मजा है आ गया गुरु

kavita,  बुध अग॰ 26, 09:18:00 am 2009  

बहुत ही अच्छी पैरोडी बनाई है

ranu,  बुध अग॰ 26, 09:32:00 am 2009  

दिल तर कर दिया आपकी पैरोडी ने

नीरज गोस्वामी बुध अग॰ 26, 03:05:00 pm 2009  

बहुत जोर की पैरोडी है..आनंद आया पढ़ कर...वाह...
नीरज

shashisinghal गुरु अग॰ 27, 12:28:00 am 2009  

वाह क्या बात है .... बहुत ही सुन्दर पैरोडी बनाई है । मजा आ गया पढ़कर ।
राजकुमार्जी यह पैरोडी भले ही आपने अपने स्कूलिंग के समय में बनाई होगी किंतु इसकी प्रासंगिकता हर वक्त बनी रहेगी , मसलन ऎसा लगता है कि जैसे ये पैरोडी आज ही लिखी गई हो

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