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शुक्रवार, अगस्त 07, 2009

सस्ते चावल ने बनाया शराबी

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिए जाने वाले सस्ते चावल को लेकर यह बात सामने आ रही है कि इस चावल के कारण लोग कामचोर और शराबी बनते जा रहे हैं। एक तो इस चावल को लेकर लोग बेच देते हैं और उन पैसों से शराब पीने का भी काम करते हैं। लगातार इस तरह की बातें सुनने को मिल रही है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस सोच के साथ यह योजना प्रारंभ की थी, वह सोच पूरी नहीं हो पा रही है। उधर चावल माफिया भी सस्ते चावल की कालाबाजारी करने का काम लगातार कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार ने पहले गरीबों को तीन रुपए किलो चावल देना प्रारंभ किया, फिर चुनाव के कारण एक रुपए और दो रुपए में चावल देने का वादा किया। आज कि तारीख में छत्तीसगढ़ में महज एक और दो रुपए किलो में चावल मिल रहा है। सरकार की सोच इसके पीछे चाहे कितनी भी अच्छी रही हो, लेकिन सरकार की यह सोच पूरी नहीं हो रही है। एक तो सस्ते चावल को खुले बाजार में ले जाने का काम चावल माफिया प्रारंभ से कर रहे हैं। सरकार चाह कर भी इन माफियाओं पर लगाम नहीं लगा सकी है। एक तरफ सस्ते चावलों की कालाबाजारी हो रही है, तो दूसरी तरफ इन चावल के हकदार गरीब खुद भी इन चावलों को बाजार में बेचने का काम कर रहे हैं। अगर जानकारों की बातें मानें तो ऐसा कोई गांव नहीं है, जहां पर गरीब चावल लेकर उसको ज्यादा कीमत में न बेच रहे हों। जानकारों को साफ कहना है कि रमन सरकार ने गरीबों को सस्ता चावल देकर उनको कामचोर और शराबी बना दिया है। सस्ते चावल के कारण लोग काम करने से कतराने लगे हैं। वैसे भी छत्तीसगढ़ में शुरू से ही यह बात रही है कि अगर किसी के घर में चार दिनों का राशन रहता है तो वह काम करने जाने की जरूरत नहीं समझता है, लेकिन जब राशन समाप्त हो जाता है, तो वह काम मांगने निकलता है।

रमन के चावल ने लोगों को शराबी भी बना दिया है, ऐसा कहा जाने लगा है। सस्ता चावल लो दुकानदारों को बेचो और पैसे लेकर पहुंच जाऊ मयखाने में पीने के लिए। और पीने के बाद फिर जाकर घर में करो मार-पीट बीबी-बच्चों से। यही सब गांव-गांव में होने की बात की जा रही है। इसके लिए सरकार को दोष नहीं दिया जा सकता है, सरकार ने तो गरीबों की मजबूरी के चलते उनको सस्ता चावल उपलब्ध करवाया था, पर उसका सही उपयोग अगर वे गरीब नहीं कर रहे हैं तो इसमें सरकार क्या कर सकती है। उन गरीबों को सस्ते चावल की कीमत समझनी होगी तब जाकर सस्ते चावल की योजना साकार होगी। लेकिन लगता नहीं है कि गरीब इस बात से बाज आएंगे कि वे सस्ते चावल का दुरूपयोग न करें।

6 टिप्पणियाँ:

sammer शुक्र अग॰ 07, 08:32:00 am 2009  

सरकार से मिली रही सुविधा का अगर कोई गलत उपयोग करता है तो इसमें सरकार क्या कर सकती है।

manoj,  शुक्र अग॰ 07, 08:43:00 am 2009  

सरकार को यह तय करना चाहिए कि सस्ता चावल लेकर उसको गरीबी कही भी बेच न सके। ऐसा चावल खरीदने वालों को कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए।

बेनामी,  शुक्र अग॰ 07, 08:57:00 am 2009  

कामचोरी के मामले में अपने छत्तीसगढ़ के लोग सच में अव्वल दर्जे के हैं।

tina शुक्र अग॰ 07, 09:05:00 am 2009  

सरकार को कालाबाजारी पर अंकुश लगाने का प्रयास करना चाहिए।

bhavna,  शुक्र अग॰ 07, 09:24:00 am 2009  

जिनको शराब पीनी है वह तो शराब पिएगा ही फिर चाहे सस्ते चावल को बेचकर पीए या घर का सामानों को बेचकर।

SATISH CHOUHAN BHILAI ( C.G.) मंगल नव॰ 03, 06:33:00 pm 2009  

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