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मंगलवार, अगस्त 25, 2009

मिल के काम करबो संगवारी-आ गे राष्ट्रीय खेल ले के बारी


प्रदेश के सभी खेल संघों के पदाधिकारियों ने खेल संचालक जीपी सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक स्वर में एक तरह से शपथ लेते हुए राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी लेने के लिए सभी स्वार्थों से ऊपर उठकर मिलकर काम करने की बात कही। बैठक में यह भी तय किया गया कि ३६ गढ़ में होने वाले राष्ट्रीय कुंभ में ३६ खेलों को शामिल किया जाएगा। राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए प्रारंभिक राशि ५० लाख देने के लिए खेल संघों ने मुख्यमंत्री डॉ। रमन सिंह के साथ खेल मंत्री सुश्री लता उसेंडी का भी आभार माना गया।


प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याणा विभाग के संचालक जीपी सिंह ने खेल मंत्री सुश्री लता उसेंडी से मिले निर्देश के मुताबिक यहां पर प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त खेल संघों की एक बैठक का आयोजन सुबह को ११ बजे सर्किट हाउस में किया। इस बैठक का मकसद जहां राष्ट्रीय खेलों के लिए खेलों का चयन करना था, वहीं खेल संघों को इस बात के लिए सहमत करना था कि किसी भी तरह के विवाद के बिना इस पर सभी सहमत हों कि प्रदेश में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन करना है। अब ये आयोजन चाहे रायपुर में हों, भिलाई में हो या फिर राजनांदगांव में हों। जहां पर जिन खेलों की सुविधाएं होंगी, वहां पर उन खेलों का आयोजन किया जाएगा।

ज्यादा पदक जीतने की योजना पर काम करें

खेल संचालक जीपी सिंह ने कहा कि सबसे पहले मैं सभी खेल संघों को कहना चाहता हूं कि राष्ट्रीय खेलों का आयोजन आप सभी के सहयोग के बिना संभव नहीं है। ऐसे में जबकि यह आयोजन प्रदेश की प्रतिष्ठा वाला होगा तो हम चाहते हैं कि हर संघ इसके लिए बिना किसी स्वार्थ के सहयोग करे। यहां पर तेरे-मेरे वाली भावना से परे सोचने की जरूरत है। इसी के साथ हर खेल संघ को इस बात के प्रयास करने हैं कि उनके खेल में पदक मिल सके। पदकों के लिए किस तरह की योजना बनानी है इसके लिए क्या जरूरी रहेगा। यह तय करना आपका काम है। उन्होंने कहा कि मुङो लगता है कि आयोजन से पहले सभी खेल संघों को तकनीकी ज्ञान बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए क्या करना होगा ये आपको बताना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेलों के आयोजन को ज्यादा स्थानों पर करना संभव नहीं होगा। वैसे रायपुर के साथ भिलाई और राजनांदगांव में आयोजन की बात की जा रही है। अब देखना यह होगा कि अंतिम फैसला क्या होता है। उन्होंने कहा कि करीब एक पखवाड़े के आयोजन में ज्यादा दूर-दूर आयोजन संभव नहीं होंगे। खेल संचालक ने बताया कि हमारा विभाग लगातार उन राज्यों के संपर्क में है जो राज्य राष्ट्रीय खेलों का आयोजन कर चुके हैं या करने वाले हैं। उनसे जितनी जानकारी मिल रही है, हम लोग एकत्रित करने का काम कर रहे हैं।


नई राजधानी में बनेगा खेल गांव

कार्यक्रम में उपस्थित उप संचालक ओपी शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि नई राजधानी में ३०० एकड़ जमीन में खेल गांव बनाने की योजना है। इसका मास्टर प्लान भी बना लिया गया है। खेल गांव बनाने में जहां ५०० करोड़ का खर्च आएगा, वहीं राष्ट्रीय खेलों के आयोजन पर भी ५०० करोड़ का खर्च होगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खेलों के लिए जो भी मैदान प्रदेश में बनाए जाएंगे, सभी अंतरराष्ट्रीय स्तर के होंगे। यही नहीं ये सारे मैदान देश के नंबर वन बनाए जाएंगे। जितने भी नए मैदानों का निर्माण होगा सभी राजधानी में बनाए जाएंगे।

३६ खेलों को रखा जाएगा


बैठक में उपस्थित प्रदेश ओलंपिक संघ के महासचिव बशीर अहमद खान ने बताया कि वर्तमान में राष्ट्रीय खेलों में ३४ खेल शामिल हैं। इन खेलों में दो और नए खेलों को जोड़कर खेलों की संख्या ३६ कर दी जाएगी ताकि ३६ गढ़ में ३६ खेलों का आयोजन करके एक अलग इतिहास बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी खेल संघ अपने-अपने खेलों के बारे में खेल विभाग को जानकारी उपलब्ध कराए कि उनके पास कितने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खिलाडिय़ों के साथ कोच, रेफरी और निर्णायक हैं। इसी के साथ सभी खेल संघ वाले अपने-अपने खेलों के मैदानों के बारे में जानकारी दें। उन्होंने भी सभी खेल संघों के पदाधिकारियों से आव्हान किया कि सभी को एक होकर काम करना है, राष्ट्रीय खेलों का आयोजन कोई हंसी खेल नहीं है। उन्होंने कहा कि जिसके मन में जो भी बातें हों सामने कहें बाहर जाकर बिना वजह की बातें करने का कोई मतलब नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कौन से नए खेलों को जोड़ा जाएगा, इसका फैसला बाद में किया जाएगा। अंत में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के बाद इस बात का ध्यान रखना होगा कि मैदान ठीक रहे इसके लिए यह जरूरी होगा कि जिन खेलों के मैदान हैं वह उस खेल संघों को दे दिए जाएं नहीं तो असम की तरह सारे मैदान रख-रखाव के अभाव में खंडहर हो जाएंगे।


विद्याचरण की मदद लेंगे मेजबानी के लिए

बैठक में उपस्थित कैनोइंग संघ के वैभव मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी लेने के लिए भारतीय ओलंपिक संघ के आजीवन अध्यक्ष विद्याचरण शुक्ल की मदद ली जानी चाहिए। अगर वे चाहेंगे तो मेजबानी मिलने में कोई विलंब नहीं होगा। यहां पर यह बताना लाजिमी होगा कि ओलंपिक संघ में विद्याचरण की तूती बोलती है। उन्होंने अगर अध्यक्ष सुरशे कलमाड़ी को छत्तीसगढ़ को मेजबानी देने के लिए कह दिया तो फिर छत्तीसगढ़ की मेजबानी पक्की हो जाएगी। आज जो बात वैभव मिश्रा ने कही, वहीं बात पहले विद्यान मिश्रा भी कह चुके हैं।

मुख्यमंत्री-खेलमंत्री का तारीफ


बैठक में तीरंदाजी संघ के कैलाश मुरारका ने राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी लेने का फैसला करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ खेल मंत्री लता उसेंडी और खेल संचालक जीपी सिंह की तारीफ करते हुए कहा कि यह एक अच्छी पहल है। यह पहल तो पहले ही हो जानी थी। अगर यह पहल पहले हो जाती तो आज सभी खेलों के लिए मैदानों की कमी नहीं रहती। श्री मुरारका ने भी मेजबानी के लिए विद्याचरण शुक्ल की मदद लेने की बात कही। पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी नीता डुमरे ने कहा कि हॉकी का आयोजन रायपुर के साथ राजनांदगांव में किया जा सकता है। और कई खेल संघों के पदाधिकारियों ने भी अपने मत रखे। बैठक में सभी मान्यता प्राप्त संघों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

4 टिप्पणियाँ:

ranju मंगल अग॰ 25, 08:47:00 am 2009  

छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी मिल जाए यही शुभकामनाएं हैं।

ajay मंगल अग॰ 25, 09:23:00 am 2009  

खेल संघा का एक जुट होना अच्छा संकेत है

tina मंगल अग॰ 25, 09:58:00 am 2009  

एकता में ही सफलता का राज है।

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