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शनिवार, अगस्त 22, 2009

राहुल गांधी की तो.....

अरे यार.. ये रास्ता भी बंद है, वो रास्ता भी बंद आखिर जाए तो जाए कहां से जाए। यार ये ऐसे नेता लोग आते ही क्यों है जिनके कारण रास्ते बंद करने पड़ते हैं। आखिर ये कौन नेता है? जिसके कारण रास्ते बंद कर दिए गए हैं। एक से बताया यार ये यह राहुल गांधी है। जैसे ही एक ने नाम लिया, दूसरे ने तपाक से कहा राहुल गांधी की तो.....।

ये नजारा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में तब नजर आया जब सोनिया गांधी से लाडले राहुल बाबा का रायपुर आना हुआ। उनका आना हमेशा की तरह से आम जनों के लिए मुसीबत का सबब बना। सुबह के समय हम भी प्रेस की मिटिंग निपटा कर लौट रहे थे। हर तरफ रास्ता बंद। बड़े रास्ते क्या हर गली-कुचे के रास्तों को बंद कर दिया गया था और कदम-कदम पर पुलिस वाले तैनात थे। पुलिस वालों का व्यवहार हमेशा की तरह आम जनों से ऐसा था मानो आमजन ही वो आतंकवादी हैं जो राहुल बाबा को उड़ा देंगे। यहां पर एक बार फिर से कुछ दिनों पहले दिल्ली हाई कोर्ट का दिया गया फैसला याद आया कि अगर नेताओं को जान का इतना ही खतरा है तो वे बाहर ही क्यों निकलते हैं।

नेताओं के कारण जब आम जनों को परेशानी होती है तो परेशानी में इंसान क्या-क्या नहीं कहने लगता है। हम जिस रास्ते से भी गुजरे और जहां भी रास्ता बंद था, वहां पर ज्यादातर लोग राहुल बाबा को कोसते हुए और गाली देते दिखे। जिसके मन में जो आ रहा था वह अपनी भड़ास गालियां देकर निकाल रहा था। किसी ने गालियों में सभ्यता दिखने की जरूरत नहीं समझी और ऐसे मामले में सभ्यता दिखाने की जरूरत भी क्या है। वास्तव में ऐसे समय में अच्छे खासे इंसान का दिमाग खराब हो जाता है। अब ऐसे में इंसान ऐसे नेताओं को जो आम जनों को कीड़ों से ज्यादा नहीं समझे हैं उनको गालियां नहीं देंगे तो क्या उनकी आरती उतारेंगे। वैसे भी आम जनों को क्या लेना-देना राहुल गांधी के दौरे से। राहुल के आने न आने से किसकी सेहत पर फर्क पड़ता है। अरे आमजनों की बात ही छोड़ दें उनके आने से तो उनकी पार्टी के लोग भी खुश नहीं होते हैं। कारण पार्टी के कितने ऐसे लोग हैं जिनको उनसे मिलने का मौका मिलता है। जिनको उनके मिलने का मौका नहीं मिलता है, वे भी मन ही मन उनको कोसते हैं, कई लोग अपने गुस्से का इजहार सार्वजनिक भी कर देते हैं।

रास्ते में जहां आम जन राहुल बाबा को कोसते नजर आए, वहीं कई पुलिस वाले भी राहुल बाबा को गालियां देने से परहेज नहीं कर रहे थे। पुलिस वालों का ऐसा कहना था कि साले ये नेता आते हैं तो जनता के साथ हमारी भी मुसीबत हो जाती है। उनके आने-जाने के समय घंटों खड़े रहो मूर्ति की तरह रास्ते में। उपर से आम जनों की गालियां भी खाओ और उनसे विवाद भी करो।

18 टिप्पणियाँ:

Vivek Rastogi शनि अग॰ 22, 06:45:00 am 2009  

व्यथित मन क्या क्या नहीं कह सकता है, पता नहीं इन सब से हमें कब छुटकारा मिलेगा ।

sam शनि अग॰ 22, 08:16:00 am 2009  

अरे आपने तो राहुल गांधी की वाट लगा दी।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक शनि अग॰ 22, 08:48:00 am 2009  

"राहुल गांधी की तो....."
आगे मत कहना भाई.....
शसससस...सस्स्स्स्स...

nitin,  शनि अग॰ 22, 09:04:00 am 2009  

राहुल गांधी को गालियां देने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

guru शनि अग॰ 22, 09:16:00 am 2009  

अब आया मजा, ये हुई ने दमदारी से लिखने की बात गुरु

पी.सी.गोदियाल शनि अग॰ 22, 09:29:00 am 2009  
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
बेनामी,  शनि अग॰ 22, 09:33:00 am 2009  

किस-किस पर कार्रवाई करवाओंगे राहुल के पिट्ठू, यहां तो हर कोई राहुल जैसे नेताओं को गालियां देता है, फिर यह कौन बताएगा कि किसने गालियां दी हैं।

vitita das,  शनि अग॰ 22, 09:42:00 am 2009  

इंसान ऐसे नेताओं को जो आम जनों को कीड़ों-मकाड़ों से ज्यादा नहीं समझे हैं उनको गालियां नहीं देंगे तो क्या उनकी आरती उतारेंगे। वैसे भी आम जनों को क्या लेना-देना राहुल गांधी के दौरे से। राहुल के आने न आने से किसकी सेहत पर फर्क पड़ता है।
100 फीसदी सच बात लिखी है आपने

बेनामी,  शनि अग॰ 22, 10:02:00 am 2009  

बहुत बडे आदमी है ये जिस तलाशी के लिये कलाम साहब लाईन मे लगे जूते उतारे ये साहब उस रास्ते कभी प्लेन मे नही चढते जी राजकुवंर है सोनिया माता के ये सो थोडी बहुत तकलीफ़ अगर आपकॊ भी देदी तो चिड्चिडाईये मत . :)

chintu शनि अग॰ 22, 10:24:00 am 2009  

मजा आ गया वाह क्या बात बताई आपने। नेताओं को गालियां ही देनी चाहिए, वो इसी लायक है। ये नालायक कब समझेंगे कि आम जनों को परेशान करके वे कब तक खैर मना सकते हैं।

tikam thakur,  शनि अग॰ 22, 10:44:00 am 2009  

पुलिस वाले भी तो इंसान ही होते हैं, कैसा भी मौसम हो उनको जब रास्ते में घंटों खड़ा रखा जाएगा तो उनका भी गुस्सा फुटेगा ही

जी.के. अवधिया शनि अग॰ 22, 12:57:00 pm 2009  

आप सही समय में ड्यूटी में पहुँचे या नहीं या अपने स्वजन को अस्पताल ले जाते रास्ता बंद होने के कारण उसकी मृत्यु हो जाये, क्या फर्क पड़ता है? हाँ नेताओं को सुविधा न मिले तो अवश्य फर्क पड़ता है।

बेनामी,  शनि अग॰ 22, 02:10:00 pm 2009  

आम जन परेशान होकर ही आज नेताओं पर जूते चलाने लगे हैं। नेता जूतो की ही भाषा समझते हैं।

ajay शनि अग॰ 22, 02:19:00 pm 2009  

लोग जाम में फंसेंगे तो गलियां नहीं देंगे तो और क्या करेंगे

बी एस पाबला शनि अग॰ 22, 03:31:00 pm 2009  

नाम बदल दीजिए, हरेक को वही गालियाँ पड़ती हैं

ranju रवि अग॰ 23, 07:20:00 am 2009  

देश के नेताओं से तो हर कोई तस्त है

Rakesh Singh - राकेश सिंह शुक्र अग॰ 28, 10:18:00 pm 2009  

भाई इन नेताओं की खबर अपने देश मैं ना सही पर अमेरिका जरुर लेता है| यही राहुल बाबा को अमेरिका मैं रोका गया था , पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ सकते हैं : http://berojgarkidayri.blogspot.com/2009/08/blog-post_26.html

ek hindustani गुरु जन॰ 07, 04:04:00 pm 2010  

sahi keh sab ne diya par ye nahi socha ke ye sab nete hamari vajah se hai sahne ki adat dal li hai to saho kisi aur ko dosh dene se kya hoga jiske liye sab likh rahe hai usse to fark bhi nahi padega.

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