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शुक्रवार, जुलाई 03, 2009

आखिर वो मिल ही गई

जिसकी हमें लंबे समय से तलाश थी
आखिर वो हमें मिल ही गई
जब वो मिल गई तो
दिल की कली खिल गई
उसके जाने के बाद दिल उदास था
उसके खोने का हमको दुखद अहसास था
लगता था अब हमें वो कभी न मिल पाएगी
जिंदगी भर की गई मेहनत बेकार जाएगी
बहुत ज्यादा तड़प थी उसके लिए दिल में
वो बेवफा न जाने जा छुपी थी कौन से बिल में
पर अचानक वो हमारे जन्मदिन के तोहफे के रूप में
जन्मदिन के एक दिन बाद बिना खबर के सामने आ गई

उसको देखते ही हमारा चेहरा खिल गया
ऐसा लगा हमें कारू का खजाना मिल गया

ये कारू का खजाना क्या है बता देते हैं हम
ज्यादा देर हुई तो निकल न जाए आपका दम
जिसने हमें इतना छकाया वो है कविताओं की डायरी
जिसमें हमने लिखी है अलग-अलग अंदाज की शायरी
अब हम अपनी डायरी के किस्से भी आपसे बांटेंगे
अपनी पुरानी कविताएं लिखकर सबको चाटेंगे

नोट: अपनी बरसों पुरानी कविताओं की डायरी मिलने की खुशी में हमने कल रात को बैठकर यह एक नई रचना लिखी है जो आप लोगों के दरबार में पेश है। हमारी कविताओं की डायरी में काफी कुछ है जिसको आगे हम बांटने का प्रयास करेंगे।

14 टिप्पणियाँ:

anu शुक्र जुल॰ 03, 08:12:00 am 2009  

पहले तो ऐसा लगा कि आप अपनी किसी पुरानी मोहब्बत का राज खोलने वाले हैं, पर अंत में पता चला कि आपकी प्यारी डायरी मिल गई। आपको कविताओं की डायरी मिलने की बधाई, आपकी कविताओं का भी इंतजार रहेगा।

neha शुक्र जुल॰ 03, 08:17:00 am 2009  

जिसने हमें इतना छकाया वो है कविताओं की डायरी
जिसमें हमने लिखी है अलग-अलग अंदाज की शायरी
अब हम अपनी डायरी के किस्से भी आपसे बांटेंगे
अपनी पुरानी कविताएं लिखकर सबको चाटेंगे
क्या खुब लिखा है, बधाई

Udan Tashtari शुक्र जुल॰ 03, 08:24:00 am 2009  

अब उस डायरी मे से कुछ सुनाओ!!

guru शुक्र जुल॰ 03, 08:31:00 am 2009  

आगाज इतनी हसीन है तो अंजाम क्या होगा गुरु

harseeta शुक्र जुल॰ 03, 09:04:00 am 2009  

मस्त अंदाज में लिखी आपने कविता, बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक शुक्र जुल॰ 03, 09:14:00 am 2009  

अच्छी खबर दी है।
पुरानी रचनाओं से ब्लॉग को धन्य करो।

tina शुक्र जुल॰ 03, 10:15:00 am 2009  

आपके इस हुनर का तो पता ही नहीं था

ओम आर्य शुक्र जुल॰ 03, 10:33:00 am 2009  

मुझे भी आपकी कविताओ का इंतजार रहेगा..........बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

Science Bloggers Association शुक्र जुल॰ 03, 11:48:00 am 2009  

मिल गयी, तो फिर लीजिए बधाई।
वैसे आपने इस बहाने अच्‍छी रचना सुनाई।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

ajay शुक्र जुल॰ 03, 12:13:00 pm 2009  

अच्‍छी रचना, बधाई

rohan शुक्र जुल॰ 03, 02:20:00 pm 2009  

बहुत ज्यादा तड़प थी उसके लिए दिल में
वो बेवफा न जाने जा छुपी थी कौन से बिल में

बहुत ही जोरदार लाइनें हैं, बधाई

asif ali,  शुक्र जुल॰ 03, 02:40:00 pm 2009  

एक डायरी को एक प्रेमिका का रूप तो एक कवि मन ही दे सकता है, बधाई

saurabh शुक्र जुल॰ 03, 02:50:00 pm 2009  

नई रचना इतनी अच्छी है तो पुरानी का क्या हाल होगा, कब होंगे आपकी पुरानी रचनाओं के दर्शन

dipak,  शुक्र जुल॰ 03, 07:02:00 pm 2009  

अच्छी रचना है

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