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मंगलवार, जून 09, 2009

गली-कूचे का वर्सन है टी-ट्वेंटी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस समय टी-ट्वेंटी के विश्व कप का खुमार छाया हुआ है। टी-ट्वेंटी को आईपीएल और आईसीएल की देने माना जा रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यह दावा करते नहीं थकता है कि उसने क्रिकेट में एक नई अवधारणा को सामने रखा है। लेकिन हकीकत में देखा जाए तो ऐसा नहीं है। अगर पीछे मुड़कर गली-कूचे में खेले जाने वाले क्रिकेट पर नजरें दौड़ाएं तो मालूम होता है कि उसका रूप टी-ट्वेंटी जैसा ही रहा है। गांवों से लेकर सड़कों तक जो क्रिकेट खेला जाता है उस क्रिकेट का रूप कुछ इसी तरह का रहता है। यहां पर ५० ओवर का मैच तो संभव नहीं होता है ऐसे में मैच को १०, १५ या फिर २० ओवर का किया जाता है। क्रिकेट में रोमांचक बढ़ाने के लिए ही गली-कूचे के इस रूप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परोस कर इससे करोड़ों रुपए की कमाई करने का काम किया जा रहा है। टी-ट्वेंटी शुद्ध रूप से कमाई का एक जरिया मात्र ही है।

आज देश के किसी भी शहर या गांव का कोई मैदान हो जब भी वहां कोई क्रिकेट मैच होता है तो वह मैच निश्चित रूप से ५० ओवर का नहीं होता है। इसी के साथ जब मंत्री एकादश, प्रशासनीय एकादश या फिर किसी भी एकादश का मैच किसी दूसरे एकादश से करवाया जाता है तो यह मैच १० से २० ओवरों का ही होता है। ऐसा आज टी-ट्वेंटी के आने के बाद हो रहा है ऐसा नहीं है। यह तो काफी पहले से चला आ रहा है। जब लोग १० और २० ओवर के मैच खेला करते थे तो उनको यह मालूम नहीं था कि उनके द्वारा तय किए मैच के इस स्वरूप को ही आगे चलकर विश्व स्तर पर अपनाया जाएगा। लेकिन आज ऐसा हो गया है। आज टी-ट्वेंटी को भारतीय क्रिकेट बोर्ड यानी बीसीसीआई क्रिकेट की एक नई अवधारणा के रूप में प्रचारित कर रहा है। बीसीसीआई का ऐसा दावा है कि उसने क्रिकेट का रूप ही बदल कर रख दिया है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि बीसीसीआई ने क्रिकेट के रूप को बदल कर रख दिया है, लेकिन वैसा नहीं जैसा वह दावा कर रहा है बल्कि कुछ ऐसा कि टी-ट्वेंटी क्रिकेट महज कमाई का साधन रह गया है। इसके बहाने करोड़ों के वारे-न्यारे हो रहे हैं। विश्व के बाजार में टी-ट्वेंटी के माध्यम से सब कमाई करने में लगे हैं।


पावर गेम है टी-ट्वेंटी-- क्रिकेट का रूप बदला है या नहीं इस मुद्दे को छोड़ दिया जाए तो यह बात जरूर है कि क्रिकेट में टी-ट्वेंटी के आगाज के बाद खिलाडिय़ों के लिए एक कड़ी चुनौती हो गई है। पूर्व रणजी खिलाड़ी राजय सिंह परिहार का कहना है कि आज टी-ट्वेंटी में आलराउंडरों की जरूरत है। इसी के साथ इसमें खेलने वाले खिलाड़ी का काफी तेज होना जरूरी है। कोई भी खिलाड़ी महज गेंदबाजी या बल्लेबाजी के दम पर टीम में नहीं रह सकता है। इसके लिए उसका हर क्षेत्र में महारथी होना जरूरी है। दमदार खिलाडिय़ों के दम पर ही टीम का जीतना संभव होता है। आज भारतीय टीम को अगर विश्व कप में प्रमुख दावेदार माना जा रहा है तो उसके पीछे सबसे बड़ा कारण यही है कि टीम में खेलने वाले खिलाड़ी कभी न कभी टी-ट्वेंटी के स्वरूप से काफी पहले से जुड़े रहे हैं। ये खिलाड़ी गली-कुचे के मैचों में ऐसे स्वरूप के साथ मैचों में खेलने के आदी रहे हैं। अब उनको जब इस स्वरूप वाले क्रिकेट में खेलने के लिए कहा गया तो वे ही सबसे ज्यादा फिट है और हिट भी हैं।

11 टिप्पणियाँ:

ravishndtv मंगल जून 09, 10:12:00 am 2009  

बहुत अच्छा लेख है। आपकी अनुमति हो तो इसे मैं इस बहस को और बड़ा करना चाहता हूं। आपका ब्लॉग मुझे काफी पसंद आता है। इस ब्लॉग की सबसे बड़ी खूबी यह है कि मैं खेल की खबरों के ज़रिये राज समाज को समझ पाता हूं। मेरे लिये यह एक नया अनुभव है।

बेनामी,  मंगल जून 09, 11:33:00 am 2009  

क्रिकेट में पैसों की गंगा पहले से ही बह रही थी अब टी-२० के बहाने और ज्यादा पैसे बटोरने का तरीका निकाला है बीसीसीआई ने।
आसिफ अली रायपुर

ajay मंगल जून 09, 11:34:00 am 2009  

हमने भी १० और २० ओवर के मैच कई गांवों में जाकर खेले हैं। यह बात ठीक लिखी है आपने कि टी-२० कोई नया फार्मूला नहीं है।

काजल कुमार Kajal Kumar मंगल जून 09, 01:00:00 pm 2009  

सही कहा आपने..हम भी शर्त लगा कर एक एक ओवर का मैच खेला करते थे...जो एक ओवर में सबसे अधिक रन बनता था, जीत जाता था..उसी का बदला हुआ रूप है 20-20.

rajesh patel मंगल जून 09, 02:22:00 pm 2009  

भारत विश्व कप जीते यही हमारी कामना है।

sam मंगल जून 09, 02:37:00 pm 2009  

टी-20 पावर गेम है यह बात सच लिखी है आपने। इसको जीतने के लिए बहुत दम चाहिए और ऐसा दम टीम इंडिया में नजर आता है।

बेनामी,  मंगल जून 09, 02:51:00 pm 2009  

भारत ही नहीं पूरा विश्व क्रिकेट के पीछे पागल है तो इसका फायदा तो जरूर उठाएंगे आयोजक। क्रिकेट के पीछे पागलपन के कारण ही तो आज आईपीएल-टी-20 का विश्व कप हो रहा है।

chintu मंगल जून 09, 03:29:00 pm 2009  

क्रिकेट का मतलब ही आज आलराऊंडर हो गया है।

बी एस पाबला मंगल जून 09, 07:47:00 pm 2009  

बात तो आप ठीक कह रहे हैं, लेकिन सावधान!!

जिस ravishndtv को आपने NDTV वाले रवीश कुमार समझा है. वो सरासर एक छल है।

कैसे? देखिये:
इस ravishndtv पर क्लिक करने पर जो प्रोफाईल सामने दिखता है उसका आईडी नम्बर है 02492102662853444219 जिस पर लिखा तो ravishandtv है किंतु उस प्रोफाईल वाले का कोई ब्लॉग नहीं दिखता, जैसा बाकी प्रोफाईलों में My Blogs के नीचे दिखता है। बल्कि नजर के धोखे से यही लगता है कि वीणापाणी उनका ब्लॉग है जबकि वह follow किया जाने वाला ब्लॉग है राधिका उमडे़कर बुधकर का!

यह सज़्ज़न / सज़्ज़नी कौन है, पता नहीं। कई बार देख चुका था। आज आपके साथ छल होते देख रोक नहीं पाया अपने आप को

रवीश कुमार का आई डी नम्बर है 04814587957935118030, चाहें तो बदल कर देख लें

PD मंगल जून 09, 09:07:00 pm 2009  

हा हा हा... हम तो 16-16 खेलते थे.. :)

वैसे पाबला जी के के पारखी नजर को भी मान गये.. :)

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