राजनीति के साथ हर विषय पर लेख पढने को मिलेंगे....

सोमवार, जून 15, 2009

रणजी खेलकर ही एक पीढ़ी तर सकती है

क्रिकेट में आज कितना पैसा आ गया है इसका सबूत इस बात से भी मिलता है कि कहा जा रहा है कि अगर कोई खिलाड़ी महज रणजी में खेल लेता है तो उसकी एक पीढ़ी तर सकती है। इस बात का खुलासा पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी राजेश चौहान ने किया है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि किसी खेल में अगर आज सबसे ज्यादा पैसा है तो वह क्रिकेट है। ऐसे में हर कोई आज क्रिकेटर ही बनना चाहता है। लेकिन यहां पर दुर्भाग्य यह है कि हर कोई बिना मेहनत किए ही मंजिल तक पहुंचने का सपना देखता है। आज के खिलाडिय़ों में मेहनत करने का जज्बा ही नहीं है।

राजधानी रायपुर में रियाज अकादमी के एक कार्यक्रम में आए राजेश ने नवोदित खिलाडिय़ों को यह बात बताते हुए कहा कि कहा कि पहले की तुलना में आज खिलाडिय़ों के लिए मौके बहुत हैं। अगर खिलाड़ी गंभीरता से खेल पर ध्यान दें और अगर उनको रणजी में ही खेलने का मौका मिल जाए तो रणजी में ही आज इतना पैसा हो गया है कि रणजी खेलकर ही आपकी एक पीढ़ी तर सकती है। राजेश चौहान का कहना है कि छत्तीसगढ़ में क्रिकेटरों के लिए सुविधाओं की कोई कमी नहीं है इसके बाद भी करीब दो दशक से यहां से कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं निकला है जिसको भारतीय टीम में स्थान मिल सकता। खिलाडिय़ों के न निकलने का एक सबसे बड़ा कारण यही नजर आता है कि आज खिलाड़ी उतनी मेहनत नहीं करना चाहते हैं जितनी मेहनत की जरूरत भारतीय टीम के दरवाजे तक जाने के लिए लगती है।

श्री चौहान ने कहा कि यहां पर सबसे वरिष्ठ खेल पत्रकार राजकुमार ग्वालानी भी बैठे हैं। मैं उनसे ही पूछता हूं कि क्या मैं गलत कह रहा हूं। क्या आज उनको यह महसूस नहीं होता है कि छत्तीसगढ़ के क्रिकेट में एक शून्य आ गया है। उन्होंने कहा कि मुझे याद है जब हम खेलते थे और कुछ भी गलत कह देते थे तो ग्वालानी जी उसको छापने से पीछे नहीं हटते थे। लेकिन आज जो क्रिकेट में शून्य आ गया है उसके बारे में वे ही कितना लिखते रहेंगे। इस शून्य को भरने के लिए आज जरूरत है मेहनत करने की।


उन्होंने मंच की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यहां पर 70 के दशक में छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले महमूद हसन जैसे खिलाड़ी बैठे हैं। इसी के साथ गंगाराम शर्मा, केविन कास्टर अनिल नचरानी जैसे खिलाड़ी हैं जो खिलाडिय़ों को प्रेरणा देते हैं। मैं 80 के दशक में भारतीय टीम में आया। इसके बाद से ही छत्तीसगढ़ में क्रिकेट शून्य में चला गया है। यहां का कोई भी एक खिलाड़ी ऐसा नजर नहीं आता है जिससे यह उम्मीद की जा सके कि वह भारतीय टीम के दरवाजे तक जा सकता है। उन्होंने याद करते हुए कहा कि जब हम लोग खेलते थे, उस समय में उतनी सुविधाएं भी नहीं थी, लेकिन हम लोग आगे बढ़े तो इसके पीछे सबसे बड़ा कारण था कि हम लोग लगातार मैदान पर मेहनत करते थे। हम लोगों में एक जुनून था कि हमें भारतीय टीम तक पहुंचना है। लेकिन आज ऐसा जुनून किसी खिलाड़ी में नजर ही नहीं आता है। उन्होंने कहा कि अगर सुविधाएं मिलने से ही सफलता मिल जाती तो हर पैसे वाले घर का लड़का या लड़की वह सब हासिल कर लेते जो वे करना चाहते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है सुविधाओं से ज्यादा महत्व आपकी सोच और मेहनत का है। श्री चौहान ने यह भी कहा कि आज सीनियर खिलाड़ी मैदान में भी नहीं आते हैं। जूनियर खिलाडिय़ों को प्रेरणा देने वालों की भी कमी है।

उन्होंने रियाज अकादमी को सलाह दी कि वे बाहर के खिलाडिय़ों के लिए एक छात्रावास की व्यवस्था करके अकादमी का बड़े पैमाने पर विस्तार करने का काम करें। उन्होंने इसी के साथ कहा कि अकादमी को दो-तीन स्कूलों के साथ अनुबंध करके अकादमी के खिलाडिय़ों को वहां शिक्षा दिलाने काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज खेल से ज्यादा महत्व पालक पढ़ाई को देते हैं ऐसे में पढ़ाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। श्री चौहान ने रियाज अकादमी द्वारा एक वेबसाइड बनाने की योजना की तारीफ करते हुए कहा कि इस वेबसाइट को ऐसा बनाना चाहिए जिसमें प्रदेश की सारी अकादमियां आ जाएँ। उन्होंने सभी अकादमियों को जोड़कर एक बेवसाइड बनाने की सलाह दी। इसी के साथ यह भी कहा कि अकादमियों के बीच अंतर अकादमी चैंपियनशिप बनाने की योजना अच्छी है, इसकी शुरुआत जल्द करनी चाहिए। जितने ज्यादा मैच खेलने के लिए खिलाडिय़ों को मिलेंगे उतना ही खिलाडिय़ों का फायदा होगा। उन्होंने महमूद हसन द्वारा रियाज अकादमी को अपनी टीम बनाने की सलाह का उल्लेख करते हुए कहा कि टीम बनाकर उनको मैच खेलने बाहर भेजना चाहिए। उन्होंने बताया कि वैसे मेरी अकादमी में रियाज अकादमी की टीम पिछले साल मैच खेलने आई थी।

9 टिप्पणियाँ:

ajay सोम जून 15, 09:12:00 am 2009  

छत्तीसगढ़ में क्रिकेट के शून्य में जाने का एक कारण छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ को लंबे समय तक मान्यता न मिलना भी रहा है।

vikas,  सोम जून 15, 09:26:00 am 2009  

पढ़ाई के महत्व से इंकार कैसे किया जा सकता है। खेल से कुछ हासिल नहीं होता यह मानसिकता आज भी अधिकाश परिवारों में है। इस मानसिकता तो तोडऩा जरूरी है।

guru सोम जून 15, 09:55:00 am 2009  

चलो रणजी ही खेल लेते हैं गुरु

vijay hotvani,  सोम जून 15, 10:16:00 am 2009  

लगता है रणजी खेलकर करोड़पति बनने का सपना साकार किया जा सकता है।

Science Bloggers Association सोम जून 15, 01:47:00 pm 2009  

सही बात कही, इस शून्‍य को भरने के लिए ठोस प्रयत्‍नों की आवश्‍यकता है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

chintu सोम जून 15, 01:52:00 pm 2009  

मेहनत तो सफलता के लिए जरूरी ही होती है।

tina सोम जून 15, 02:06:00 pm 2009  

अच्छी जानकारी दी आपने आभार

काजल कुमार Kajal Kumar सोम जून 15, 02:38:00 pm 2009  

सही बात है, क्रिकेट में आज पैसा है तो प्रतिस्पर्धा भी उतनी ही है, ऐसे में म्हणत और भी ज्यादा चाहिए.

काजल कुमार Kajal Kumar सोम जून 15, 02:39:00 pm 2009  

म्हणत = मेहनत (भूल सुधार)

Related Posts with Thumbnails

ब्लाग चर्चा

Blog Archive

मेरी ब्लॉग सूची

  © Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP