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शनिवार, जून 06, 2009

मौसम ने ली अगड़ाई - जोर की आंधी आई


हमारे शहर में अचानक कल शाम को मौसम ने अगड़ाई ली और फिर आई जोर की आंधी। इस आंधी में जहां पूरा शहर अस्त-व्यस्त हो गया, वहीं हमने अपने घर की छत से मौसम के मिजाज के कुछ नजारों को अपने कैमरे में कैद किया जो यहां प्रस्तुत हैं।

8 टिप्पणियाँ:

नीरज गोस्वामी शनि जून 06, 03:26:00 pm 2009  

अरे वाह...हम तो अभी तक इंतज़ार में हैं...आंधी बदल कोई नहीं आया...लेकिन यहाँ तो जो एक बार आ गया फिर वो तीन महीने पहले हिलता नहीं...खोपोली जगह ही ऐसी है...
नीरज

RAJNISH PARIHAR शनि जून 06, 04:12:00 pm 2009  

राजस्थान की आंधी तो ऐसी ही होती है भाई.....!बाकि आपने फोटो बहुत ही अच्छे लिए है...

ajay शनि जून 06, 04:56:00 pm 2009  

आसमान के नजारों की अच्छी तस्वीरें खींच है आपने

neha शनि जून 06, 04:59:00 pm 2009  

लगता है आपके प्रदेश में मानसून की दस्तक हो गई है, बधाई

बी एस पाबला शनि जून 06, 05:51:00 pm 2009  

हमें तो मौका ही नहीं मिल पाया फोटो का! 15 फुट का बोगनविलिया धराशायी हो गया था घर में। उसी में भिड़े हुये थे

Anil Pusadkar शनि जून 06, 11:02:00 pm 2009  

यही एक काम बाकी था राजकुमार। अब तो तुम नाम के आगे फ़ोटोग्राफ़र भी लगा सकते हो। हा हा हा हा हा।बढिया खींची तस्वीर्।

राजकुमार ग्वालानी रवि जून 07, 01:00:00 am 2009  

अनिल जी,
हमें तो शुरू से ही फोटोग्राफी का शौक है और जहां तक हम समझते हैं कि हम एक अच्छे फोटोग्राफर शुरू से हैं। वैसे भी एक पत्रकार को फोटोग्राफर भी होना चाहिए। अगर पत्रकार में फोटोग्राफर के गुण न हों तो उसको फोटोग्राफर तो बना ही देंगे न। यह शायद हमारा दुर्भाग्य है कि इतने लंबे तक आपने हमारे साथ काम किया फिर भी आप हमारे इस गुण ने अंजान रहे। वैसे कभी हमने किसी को यह बताने की जरूरत महसूस नहीं ंकी कि हम फोटोग्राफी भी कर लेते हैं। अगर हम ऐसा करते तो जरूर प्रेस के एक फोटोग्राफर की छुट्टी हो जाती और हमने कभी किसी के पेट पर लात मारना नहीं सीखा है। हमें अपने नाम के आगे फोटोग्राफर लिखने की जरूरत कभी नहीं पडऩे वाली है, हां अगर समय आया तो अपने को एक अच्छा फोटोग्राफर साबित करने से पीछे हटने वाले नहीं हैं। हमने समय-समय पर अपने अखबार के लिए भी फोटोग्राफी की है, लेकिन कभी फोटोग्राफी नाम के लिए नहीं की है। अब अपना ब्लाग है और जब हम खुद फोटो खींचना जानते हैं तो फिर उसका उपयोग करने में क्या बुराई है।

अल्पना वर्मा रवि जून 07, 01:18:00 pm 2009  

बहुत ही सुनदर तस्वीरें कैद की हैं आप ने--किस्मत वाले हैं इतनी जल्दी बारिशों का आनंद ले रहे हैं-

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