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शुक्रवार, जून 26, 2009

पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक

हमारे एक मित्र ने कल रात को मोबाइल की घँटी बचाई और जब बातों का सिलसिला प्रारंभ हुआ तो उन्होंने कहा कि यार तू कौन से जमाने में जीता है और कौन सी मिट्टी का बना है। बात हमारी समझ में आई नहीं हमने कहां अबे सीधे-सीधे बक न क्या बकना चाहता है। फिर उसने घुमाने वाली कही कि तुम साले सुधर नहीं सकते जैसे कॉलेज के जमाने में थे, वैसे ही अब भी हो। आखिर हो न अलग टाइप के पत्रकार। हमने कहां बहुत हो गया यार सीधे-सीधे बताते हो या हम काट दें मोबाइल। हमारा ऐसा बोलना था कि वो आ गया लाइन पर और उसने जो बात बोली वह बात ठीक तो है, पर हम क्या करें हमारी ऐसी आदत नहीं है कि हम जो करें उसके बारे में बोलें। दरअसल हमारे कॉलेज के वे मित्र हमारे ब्लाग की बात कर रहे थे और उन्होंने ही हमारा ध्यान इस तरफ दिलाने का प्रयास किया कि हमारे ब्लाग राजतंत्र और खेलगढ़ को मिलाकर पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक कब का हो चुका है।

हमारे मित्र ने जब यह बात कही तो हमने उससे कहा कि तो क्या हो गया अगर नाबाद तिहरा शतक पूरा हो गया है। क्या अपने वीरेन्द्र सहवाग के पेट में दर्द हो रहा है या फिर अपने ब्रायन लारा को डर लगने लगा है कि कहीं उनका पांच सौ का रिकॉर्ड न टूट जाए। वैसे तुम जानते हो कि हम लिखेंगे तो पांच सौ क्या एक हजार रनों का भी रिकॉर्ड टूट सकता है। और रही बात यह सब बताने की तो इसमें बताने वाली क्या बात है। यह तो सबको दिख रहा है कि हमारी कितनी पोस्ट हो गई है। इस पर उसने तपाक से कहा अबे गधे तू कब सुधरेगा, आज के जमाने में बिना बताए किसी को कुछ मालूम नहीं होता है। और अगर मालूम होता भी है तो कोई बताता नहीं है। हमने कहा कि फिर तू क्यों राग अलाप रहा है कि हमारी पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक हो गया है और लिखने की गाड़ी पूरी रफ्तार से दौड़ी जा रही है।

अरे यार तेरे से बात करना ही मूर्खता है। अबे में तूझे इसलिए बता रहा हूं क्योंकि कोई चाहे या न चाहे लेकिन मैं तेरा सबसे अच्छा और पुराना दोस्त होने के नाते चाह रहा हूं कि तू एक पोस्ट लिखे जिसमें यह बताए कि तेरी पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक पूरा हो गया है। मैंने कहा कि अगर न लिखूं तो। उसने कहा कि कैसे नहीं लिखेगा बे.. जब सब लिखते हैं तो तूझे लिखने में क्या परेशानी है। मैंने कहा क्या जो सब लोग करते हैं वह करना जरूरी है। उसने कहा कि दिक्कत क्या है। हमने कहा कि दिक्कत-विक्कत कुछ नहीं है, यार तू तो जानता है कि मुझे यह सब पसंद नहीं आता है। तूझे क्या लगता है कि क्या मुझे मालूम नहीं था कि मेरी कब 100वीं पोस्ट खेलगढ़ में पूरी हुई फिर 200 वीं पोस्ट हुई अब खेलगढ़ ही तिहरे शतक की तरफ चल पड़ा है। राजतंत्र में भी शतक कुछ समय पहले पूरा हुआ है।

लेकिन इन बातों को बताने से फायदा क्या है। मित्र ने कहा फायदा-वायदा तो मैं नहीं जानता, लेकिन मैंने कई लोगों को देखा है बताते हुए कि आज की पोस्ट उनकी 100वीं पोस्ट है। बस मैं भी चाहता हूं कि तू भी ऐसा कर। लेकिन तू बताएगा इससे क्या होगा क्या? अरे यार तू अपने बारे में नहीं तो कम से कम मेरे बारे में तो सोच। जैसे मैं कॉलेज के जमाने में अपने मित्रों को बताता था कि देखो मेरे मित्र राजकुमार का लेख उस अखबार में छपा है या जब तुमने शुरू में अखबार में काम करना प्रारंभ किया था तब मैं कैसे दोस्तों को बताता था कि देख यार राजकुमार ने क्या मस्त रिपोर्ट छापी है। बस मैं चाहता हूं कि तू अपने ब्लाग के बारे में लिखे तो मैं आज भी उसी तरह से अपने दोस्तों तो यह बताऊं कि देखो मेरे दोस्त राजकुमार ने ब्लाग में पोस्ट का नाबाद तिहरा शतक पूरा कर लिया है। क्या तू अपने दोस्त की इतनी सी बात नहीं मान सकता है। चल ठीक है हम तेरी बात मान लेते हैं, लेकिन पहली और आखिर बार होगा, इसके बाद तू फिर मुझे यह मत कहना कि अब हम 400 और 500 पोस्ट होने की बात भी लिखूं। उसने कहा ठीक है न बे, पहले तू एक बार लिख तो सही।

अब दोस्त ने इतने अधिकार से यह बात कही थी तो लिखना ही था, सो हमने भी लिख दिया कि पोस्ट में हमारा नाबाद तिहरा हो चुका है और अभी हम ब्लाग की क्रीज पर टडे हुए हैं। वैसे आउट होने वाले बल्लेबाज तो हम हैं नहीं। हो सकता है कि किसी कारण से ब्रेक लेना पड़ जाए, वैसे अब तक ऐसी नौबात आई नहीं है। और भगवान न करे ऐसी नौबात आए। हम तो अपनी जिंदगी की अंतिम सांस तक कुछ ऐसा लिखने की तमन्ना रखते हैं जिससे किसी न किसी का भला हो। किसी का दिल दुखे ऐसी कोई पोस्ट हम कभी भी लिखना पसंद नहीं करेंगे।

12 टिप्पणियाँ:

anu शुक्र जून 26, 09:25:00 am 2009  

आपके लेखन की गाड़ी तो सच में तेज रफ्तार से दौड़ रही है, बधाई

asif ali,  शुक्र जून 26, 09:28:00 am 2009  

खुदा करें आपकी उंगलिया ताउम्र की-बोर्ड पर ऐसे ही चलती रहे, मुबारकबाद

tina शुक्र जून 26, 09:42:00 am 2009  

आपकी यह बात बहुत अच्छी लगी कि आप जिंदगी की अंतिम सांस तक किसी के भी भले के लिए लिखना चाहते हैं। ऐसे लोग कहां मिलते हैं आज के स्वार्थी जमाने में

guru शुक्र जून 26, 09:56:00 am 2009  

हमारी भी बधाई हो स्वीकार करें गुरु

ajay शुक्र जून 26, 10:17:00 am 2009  

आपका राजतंत्र और खेलगढ़ इसी तरह से पोस्ट की बरसात करता रहे यही कामना है

shusil varma,  शुक्र जून 26, 10:21:00 am 2009  

पोस्ट की तरह बारिश भी हो जाए तो गर्मी से कुछ निजात मिले, बधाई

नीरज गोस्वामी शुक्र जून 26, 01:00:00 pm 2009  

आप तो जबरदस्त लिख्खाड हैं...तीसरे दशक की बधाई...जो शक्श सहवाग की तरह लेखन में उतर जाए उसके लिए तीसरा चौथा पांचवां शतक मामूली बात है...उम्मीद करते हैं की जल्द ही आपकी हजारवीं पोस्ट आये...आमीन.
नीरज

sanjay pal,  शुक्र जून 26, 03:06:00 pm 2009  

आपके उन मित्रों को भी बधाई जिन्होंने आपको पोस्ट के नाबाद तिहरे शतक की याद दिलाई

neha शुक्र जून 26, 03:07:00 pm 2009  

ऐसे ही लिखते रहे और समाज को जगाते रहे, बधाई

vinod,  शुक्र जून 26, 03:24:00 pm 2009  

क्या स्टाईल में लिखेला है बिडू मजा आ गयेला अपनु भी बधाई देना मांगता

rohan शुक्र जून 26, 04:26:00 pm 2009  

बहुत-बहुत बधाई

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